EPS-95 पेंशन योजना (EPS-95 Pension Scheme) की बात करते हुए एक गहरी भावनात्मक लहर उभरती है। यह केवल पैसों की लड़ाई नहीं है, बल्कि करोड़ों बुजुर्ग कर्मचारियों की आबरू और स्वाभिमान की लड़ाई है। नेशनल स्ट्रगल कमिटी (NSC) के नेतृत्व में पिछले 8-10 वर्षों से देशभर में संघर्ष चल रहा है, जिसमें बुजुर्ग, अशक्त, असहाय पेंशनर क्रूर सिस्टम के विरुद्ध एकजुट होकर अपनी आवाज़ बुलंद कर रहे हैं।

7500 रुपये मासिक पेंशन और महंगाई भत्ते की मांग अब केवल एक नारा नहीं, बल्कि एक सुनिश्चित भविष्य की ओर बढ़ता कदम है। वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और श्रम मंत्री द्वारा कई बैठकों में इस विषय पर गहन चर्चा हुई है। सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि अब यह विषय मिशन मोड पर है, यानी इसे युद्ध स्तर पर निपटाने की तैयारी है।
सरकार से मिल रही प्रतिक्रिया और उम्मीद की नई किरण
वित्त मंत्री के साथ हुई तीन बैठकों में यह स्पष्ट हुआ कि सरकार अब इस विषय पर गंभीर है। वित्त मंत्री ने न केवल चर्चा की बल्कि खुद ट्वीट कर इस मुलाकात की जानकारी भी दी, जो एक बड़ी बात है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी स्वयं इस मुद्दे पर समय देकर पेंशनर्स की स्थिति को समझा और सहयोग का आश्वासन दिया।
EPS-95 के तहत जमा राशि और मिलने वाली पेंशन के बीच का असमान अनुपात अब असहनीय हो चुका है। 30 साल तक मासिक 541, 1250, 417 रुपये जमा करने के बाद सिर्फ 1000 रुपये की पेंशन—यह कहां का न्याय है? सरकार को इस अन्याय को समाप्त करना ही होगा।
संघर्ष की ताकत और संस्कृति की रक्षा
यह संघर्ष केवल पेंशन की नहीं, संस्कृति की भी है। भारत जैसे देश में जहां “मातृ देवो भव”, “पितृ देवो भव” की मान्यता है, वहां बुजुर्गों को वृद्धाश्रमों में नहीं, सम्मानित जीवन मिलना चाहिए। संगठन ने सरकार को यह स्पष्ट किया कि अगर फाइनेंशियल सशक्तिकरण दिया जाए, तो वृद्धजन अपने परिवार में सम्मान के साथ जी सकते हैं, और वृद्धाश्रमों की आवश्यकता स्वतः समाप्त हो जाएगी।
संगठन की अनूठी पहल और समाधान
NSC ने सिर्फ मांगें नहीं रखीं, बल्कि समाधान भी पेश किए। जैसे कि:
- 8.33% के बजाय पूरा 12% योगदान स्वीकार करने की पेशकश
- 15,000 की वेतन सीमा को बढ़ाकर 25,000 करने का सुझाव
- 58 वर्ष से ही Ayushman Bharat की सुविधा देने की मांग, जिससे बुजुर्गों को बीमारियों के वक्त राहत मिल सके
- फंड का ब्याज सरकार हमें दे दे, असल हम नहीं मांग रहे
ब्यूरोक्रेसी की अड़चनें अब टूट रही हैं।
EPFO और श्रम मंत्रालय के उच्च अधिकारियों के साथ पावरपॉइंट प्रेजेंटेशन में यह समझाया गया कि कैसे हर साल सरकार को लाखों करोड़ का ब्याज प्राप्त होता है, और उसमें से सिर्फ एक छोटा हिस्सा पेंशनर्स को दिया जा रहा है। इस पर किसी ने भी आपत्ति नहीं जताई, जो यह दर्शाता है कि मुद्दा पूर्णतः वाजिब है।
प्रश्न 1: EPS-95 स्कीम के तहत 7500 रुपये पेंशन कब तक मिलेगी?
उत्तर: अगले दो महीनों में सरकार के मिशन मोड में काम करने की पुष्टि हुई है। उम्मीद है कि 7500 रुपये मासिक पेंशन और महंगाई भत्ता शीघ्र मिलेगा।
प्रश्न 2: क्या सरकार इस स्कीम में योगदान देगी?
उत्तर: NSC ने सुझाव दिया है कि सरकार श्रमयोगी मानधन योजना की तरह EPS-95 में भी अपना योगदान दे। इस पर वित्त मंत्री ने सकारात्मक संकेत दिए हैं।
प्रश्न 3: जिनकी पेंशन पहले से चल रही है, उन्हें कितना लाभ मिलेगा?
उत्तर: उन्हें न्यूनतम 7000 रुपये पेंशन और साथ में महंगाई भत्ता मिलेगा, बिना कोई अतिरिक्त भुगतान किए।
प्रश्न 4: उच्च पेंशन के लिए पैसा भरने वालों का क्या होगा?
उत्तर: उच्च पेंशन की गणना व्यक्ति के अंतिम वेतन और कार्यकाल पर निर्भर करेगी। NSC ने सलाह दी है कि इसपर लाभ-हानि का आंकलन कर निर्णय लें।
प्रश्न 5: क्या EPS-95 पेंशनरों को आयुष्मान भारत का लाभ मिलेगा?
उत्तर: जी हां, सरकार ने 58 से 70 की उम्र के बीच ESIC के माध्यम से स्वास्थ्य सेवाएं देने पर सहमति जताई है।
EPS-95 पेंशन योजना को लेकर बुजुर्गों का संघर्ष अब निर्णायक मोड़ पर है। यह संघर्ष न केवल पेंशन की लड़ाई है, बल्कि भारत के बुजुर्गों को सामाजिक और आर्थिक सम्मान दिलाने की एक ऐतिहासिक लड़ाई बन चुका है। सरकार की ओर से सकारात्मक संकेत मिल रहे हैं, लेकिन जब तक अंतिम फैसला नहीं आता, तब तक आवाज बुलंद रखना जरूरी है।