
रिटायरमेंट प्लानिंग (Retirement Planning) एक महत्वपूर्ण वित्तीय निर्णय होता है, जिसमें सही विकल्प चुनना बेहद जरूरी है। कर्मचारी भविष्य निधि-EPF और नेशनल पेंशन सिस्टम-NPS, दोनों ही लोकप्रिय रिटायरमेंट योजनाएं हैं, लेकिन दोनों में कुछ बुनियादी अंतर हैं। यह लेख आपको दोनों योजनाओं की विशेषताओं, लाभों और जोखिमों को समझने में मदद करेगा ताकि आप अपनी वित्तीय स्थिति के अनुसार सही निर्णय ले सकें।
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EPF: सुरक्षित रिटर्न और दीर्घकालिक स्थिरता
कर्मचारी भविष्य निधि-EPF, एक गारंटीड रिटर्न देने वाली योजना है, जिसमें कर्मचारी और नियोक्ता दोनों का योगदान होता है। यह योजना विशेष रूप से संगठित क्षेत्र के कर्मचारियों के लिए बनाई गई है। वर्तमान में EPF पर ब्याज दर 8.15% है, जिसे सरकार हर साल तय करती है।
इस योजना की सबसे बड़ी खासियत यह है कि यह बाजार जोखिम से मुक्त होती है, जिससे निवेशकों को निश्चित और सुरक्षित रिटर्न मिलता है। रिटायरमेंट के समय EPF एकमुश्त राशि प्रदान करता है, जिससे व्यक्ति की वित्तीय स्थिरता बनी रहती है। साथ ही, EPF का लाभ टैक्स-फ्री होता है, जिससे निवेशकों को अतिरिक्त वित्तीय लाभ मिलता है।
NPS: उच्च रिटर्न की संभावना और निवेश लचीलापन
नेशनल पेंशन सिस्टम-NPS, एक बाजार-आधारित निवेश योजना है, जिसमें निवेशक को इक्विटी (Equity) और डेट (Debt) फंड के बीच चयन करने का विकल्प मिलता है। इसमें रिटर्न पूरी तरह से बाजार की स्थिति पर निर्भर करता है, जिससे दीर्घकालिक निवेश पर उच्च रिटर्न की संभावना होती है।
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NPS की एक महत्वपूर्ण विशेषता यह है कि यह सभी भारतीय नागरिकों के लिए उपलब्ध है, चाहे वे सरकारी या निजी क्षेत्र में काम करते हों या फिर स्वयं-नियोजित हों। इसमें निवेशकों को 60 वर्ष की आयु के बाद पेंशन के रूप में धन प्राप्त होता है, जिससे उन्हें एक नियमित आय स्रोत मिलता है। हालांकि, इसमें पूरी राशि एकमुश्त नहीं मिलती, बल्कि 40% राशि को अनिवार्य रूप से एन्युटी (Annuity) में बदलना होता है।
EPF बनाम NPS
EPF उन लोगों के लिए आदर्श है जो कम जोखिम में स्थिर रिटर्न चाहते हैं। यह योजना लंबी अवधि के लिए सुरक्षित निवेश प्रदान करती है और टैक्स लाभ भी देती है। वहीं, NPS उन निवेशकों के लिए बेहतर विकल्प हो सकता है, जो अधिक रिटर्न की तलाश में हैं और जोखिम उठाने के लिए तैयार हैं। इसमें निवेशकों को अपने पोर्टफोलियो को इक्विटी और डेट में विभाजित करने का लचीलापन मिलता है, जिससे उन्हें अधिक नियंत्रण मिलता है।
विशेषज्ञों का मानना है कि EPF और NPS दोनों में निवेश करना एक स्मार्ट रणनीति हो सकती है। EPF वित्तीय सुरक्षा प्रदान करता है, जबकि NPS अधिक रिटर्न की संभावना देता है। सही निर्णय लेने के लिए, निवेशकों को अपने वित्तीय लक्ष्यों और जोखिम सहने की क्षमता को ध्यान में रखना चाहिए।
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