करोड़ों EPFO सब्सक्राइबर्स को बड़ा झटका! ब्याज दर में कटौती की तलवार लटकी, रिटर्न होगा कम

ईपीएफओ ब्याज दर में कटौती की संभावना जताई जा रही है, जिससे करोड़ों कर्मचारियों को झटका लग सकता है। बढ़ते क्लेम सेटलमेंट और स्टॉक मार्केट में गिरावट के चलते ईपीएफओ की आय प्रभावित हुई है। 2024-25 में पीएफ क्लेम सेटलमेंट ₹2.05 लाख करोड़ तक पहुंच गया, जिससे ब्याज दरों पर दबाव बढ़ा है। बैठक के बाद ही तय होगा कि इस साल ब्याज दर क्या होगी।

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Written by Rohit Kumar

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करोड़ों EPFO सब्सक्राइबर्स को बड़ा झटका! ब्याज दर में कटौती की तलवार लटकी, रिटर्न होगा कम
EPFO interest rate cut

प्राइवेट सेक्टर में काम करने वाले करोड़ों लोगों को झटका लग सकता है। ईपीएफओ-EPFO के सेंट्रल बोर्ड ऑफ ट्रस्टीज की बैठक शुक्रवार को होने वाली है, जिसमें फाइनेंशियल ईयर 2025 के लिए पीएफ-Provident Fund ब्याज दर पर फैसला लिया जाएगा। बिजनेस स्टैंडर्ड की एक रिपोर्ट के अनुसार, इस बार ईपीएफओ ब्याज दर में कटौती संभव है। इसकी मुख्य वजह स्टॉक मार्केट और बॉन्ड यील्ड से हुई कमाई में आई गिरावट बताई जा रही है। इसके साथ ही, बढ़ते क्लेम सेटलमेंट के कारण भी ईपीएफओ के फंड पर दबाव बढ़ा है।

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पिछली बार पीएफ ब्याज दर को बढ़ाकर 8.25% किया गया था, जबकि इससे पहले 2022-23 में यह 8.15% थी। ईपीएफओ की इनवेस्टमेंट कमेटी ने हाल ही में एक बैठक की थी, जिसमें संगठन की आय और व्यय प्रोफाइल पर चर्चा हुई। इस बैठक के बाद, संभावना जताई जा रही है कि इस वर्ष ब्याज दर घट सकती है, क्योंकि बॉन्ड यील्ड में गिरावट के कारण ईपीएफओ की आय प्रभावित हुई है।

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ईपीएफओ ब्याज दर का ऐतिहासिक परिप्रेक्ष्य

1952-53 में ईपीएफओ की ब्याज दर 3% थी, जो धीरे-धीरे बढ़ते हुए 1989-90 में 12% तक पहुंच गई। यह अब तक की सबसे अधिक ब्याज दर थी, जो 2000-01 तक बरकरार रही। 2001-02 में इसे 9.5% कर दिया गया, और 2005-06 में यह और घटकर 8.5% पर आ गई। 2010-11 में इसे फिर से 9.5% किया गया, लेकिन 2011-12 में इसे 8.25% पर ला दिया गया। 2021-22 में 8.10% की सबसे निचली ब्याज दर देखने को मिली थी।

ईपीएफओ क्लेम सेटलमेंट और निकासी का बढ़ता दबाव

ईपीएफ खातों में कर्मचारियों की बेसिक सैलरी का 12% योगदान होता है, और नियोक्ता भी समान राशि जमा करता है। ईपीएफओ के लगभग 7 करोड़ सब्सक्राइबर्स हैं। सरकारी आंकड़ों के अनुसार, 2024-25 में 5.08 करोड़ से अधिक क्लेम सेटल किए गए, जिनकी कुल राशि ₹2.05 लाख करोड़ थी। इसके मुकाबले 2023-24 में 4.45 मिलियन क्लेम सेटल हुए, जिनकी कुल वैल्यू ₹1.82 लाख करोड़ थी। इस साल ईपीएफ निकासी में वृद्धि देखने को मिली है, जिससे ब्याज दरों को बनाए रखना चुनौतीपूर्ण हो सकता है।

ब्याज दरों में कटौती के संभावित कारण

  • स्टॉक मार्केट और बॉन्ड यील्ड में गिरावट: ईपीएफओ के निवेश से मिलने वाली आय में कमी आई है।
  • बढ़ते क्लेम सेटलमेंट: अधिक निकासी से ईपीएफओ के फंड पर दबाव बढ़ा है।
  • अर्थव्यवस्था में उतार-चढ़ाव: महंगाई और सरकारी नीतियों का भी ब्याज दरों पर प्रभाव पड़ सकता है।
  • कोई अतिरिक्त सरप्लस नहीं: यदि ब्याज दर अधिक रखी जाती है, तो ईपीएफओ के पास सरप्लस फंड नहीं रहेगा।

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