
फिक्स्ड डिपॉज़िट-FD निवेश का एक सुरक्षित विकल्प माना जाता है, लेकिन कई लोग यह समझते हैं कि FD से मिलने वाला ब्याज टैक्स फ्री होता है। सच्चाई यह है कि FD पर मिलने वाला ब्याज पूरी तरह टैक्सेबल होता है और यह आपकी कुल वार्षिक आय में जोड़कर इनकम टैक्स के दायरे में आ जाता है। इसे लेकर बैंक अक्सर पारदर्शिता नहीं रखते, जिससे आम निवेशक भ्रमित हो जाते हैं।
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FD ब्याज पर TDS की सीमा और दरें
यदि आपकी सालाना FD ब्याज इनकम ₹40,000 से अधिक है, तो बैंक 10% TDS यानी टैक्स डिडक्टेड ऐट सोर्स काटता है। वरिष्ठ नागरिकों यानी जिनकी उम्र 60 वर्ष या उससे अधिक है, उनके लिए यह सीमा ₹50,000 है। यानी यदि एक वरिष्ठ नागरिक को FD से ₹55,000 का ब्याज मिल रहा है, तो ₹5,000 पर 10% TDS यानी ₹500 टैक्स काटा जाएगा। हालांकि, यह TDS फाइनल टैक्स नहीं होता, आपको अपनी कुल आय के हिसाब से रिटर्न भरते समय अतिरिक्त टैक्स देना पड़ सकता है या रिफंड भी मिल सकता है।
Form 15G और 15H से TDS से बचाव
अगर आपकी कुल आय टैक्स छूट की सीमा के भीतर है, तो आप बैंक में Form 15G या वरिष्ठ नागरिकों के लिए Form 15H जमा कर सकते हैं। इससे बैंक आपकी ब्याज इनकम पर TDS नहीं काटेगा। लेकिन अगर आपकी आय सीमा से अधिक है और आपने गलत फॉर्म भर दिया, तो आपको पेनल्टी और ब्याज सहित टैक्स भरना पड़ सकता है।
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टैक्स सेविंग FD में निवेश और उसका टैक्स नियम
टैक्स सेविंग FD, जो 5 साल की लॉक-इन अवधि के साथ आती है, इनकम टैक्स एक्ट की धारा 80C के तहत ₹1.5 लाख तक की टैक्स छूट देती है। हालांकि, यह छूट केवल जमा की गई राशि पर मिलती है, न कि उस पर मिलने वाले ब्याज पर। टैक्स सेविंग FD से मिलने वाला ब्याज भी अन्य FD की तरह टैक्सेबल होता है।
NRE FD पर ब्याज पूरी तरह टैक्स फ्री
अगर आप NRI हैं और आपने भारत में NRE (Non-Resident External) फिक्स्ड डिपॉज़िट में निवेश किया है, तो उस पर मिलने वाला ब्याज भारत में पूरी तरह टैक्स फ्री होता है। यह नियम तब तक लागू होता है जब तक आप NRI स्टेटस में रहते हैं। जैसे ही आपका स्टेटस ‘Resident’ हो जाता है, यह टैक्स छूट समाप्त हो जाती है।
ब्याज पर टैक्स की गणना और रिटर्न फाइलिंग
ब्याज इनकम को आपकी अन्य आय जैसे सैलरी, रेंटल इनकम, बिज़नेस प्रॉफिट के साथ जोड़कर इनकम टैक्स स्लैब के अनुसार टैक्स लगाया जाता है। अगर आप 20% या 30% टैक्स स्लैब में आते हैं, तो आपको उस दर से FD ब्याज पर टैक्स देना होगा। इनकम टैक्स रिटर्न में ब्याज इनकम को “Income from Other Sources” में दिखाना जरूरी होता है।
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