EPFO भर्ती पर बवाल! दिल्ली हाईकोर्ट ने भर्ती नियमों पर उठाए सवाल, जारी किया नोटिस

EPFO की नई भर्ती नीति में NIRF टॉप 40 लॉ कॉलेजों से स्नातक उम्मीदवारों को अतिरिक्त अंक दिए जाने पर सवाल उठे हैं। दिल्ली हाईकोर्ट ने इस पर केंद्र सरकार से जवाब मांगा है। यह मामला सरकारी भर्ती प्रक्रियाओं में समान अवसर बनाम योग्यता आधारित चयन की बहस को गहरा कर रहा है।

rohit

Written by Rohit Kumar

Published on

EPFO भर्ती पर बवाल! दिल्ली हाईकोर्ट ने भर्ती नियमों पर उठाए सवाल, जारी किया नोटिस

कर्मचारी भविष्य निधि संगठन (EPFO) की नई भर्ती नीति पर दिल्ली हाईकोर्ट ने गंभीर सवाल खड़े किए हैं। हाईकोर्ट ने विशेष रूप से EPFO Recruitment 2025 में Young Professionals की भर्ती प्रक्रिया में अपनाए गए मूल्यांकन मानकों को लेकर केंद्र सरकार को नोटिस जारी किया है। याचिका में यह आरोप लगाया गया है कि NIRF top 40 law colleges से स्नातक आवेदकों को 100 में से 15 से 30 अतिरिक्त अंक दिए गए, जो बाकी उम्मीदवारों के साथ भेदभावपूर्ण है।

हमारे व्हॉट्सऐप चैनल से जुड़ें WhatsApp

यह भी देखें: TDS रेट चार्ट 2024-25: सैलरी, FD, रेंट और प्रोफेशनल फीस पर कितना कटेगा टैक्स? पूरी लिस्ट देखें

हमारे व्हॉट्सऐप चैनल से जुड़ें WhatsApp

रैंकिंग पर आधारित अंक व्यवस्था पर उठे सवाल

इस विवाद का मूल कारण EPFO द्वारा अपनाई गई वो नीति है, जिसमें National Institutional Ranking Framework यानी NIRF Ranking में शीर्ष 40 में आने वाले लॉ कॉलेजों के छात्रों को अतिरिक्त वेटेज दिया गया। यह नीति भले ही योग्यता आधारित चयन के पक्ष में दिखाई दे, लेकिन याचिकाकर्ता का तर्क है कि यह संविधान के अनुच्छेद 14 और 16 के तहत समानता और अवसर की गारंटी का उल्लंघन करती है।

दिल्ली हाईकोर्ट की सख्ती

इस याचिका पर सुनवाई करते हुए दिल्ली हाईकोर्ट की पीठ, जिसमें न्यायमूर्ति देवेंद्र कुमार उपाध्याय और न्यायमूर्ति तुषार राव गेडेला शामिल हैं, ने केंद्र सरकार से इस नीति पर स्पष्ट जवाब मांगा है। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि वह यह परखना चाहता है कि क्या यह अंक देने की नीति वस्तुतः भेदभाव नहीं करती। अगली सुनवाई की तारीख 23 अप्रैल निर्धारित की गई है।

यह भी देखें: इतने लोगों के बुढ़ापे का सहारा है PF, क्या आपको भी मिलते हैं ये फायदे?

केंद्र सरकार की स्थिति और संभावित प्रभाव

केंद्र सरकार को अब इस बात का जवाब देना है कि EPFO जैसे सरकारी संगठन की भर्ती नीति में NIRF रैंकिंग का यह विशेषाधिकार किस आधार पर तय किया गया। यदि कोर्ट इस नीति को असंवैधानिक मानता है, तो भविष्य की Government Job Recruitment Policies पर भी इसका असर पड़ सकता है। यह मामला न केवल EPFO भर्ती बल्कि पूरे सरकारी सिस्टम में Merit-Based Selection बनाम Equal Opportunity के बीच संतुलन की बहस को जन्म देता है।

भविष्य की भर्तियों पर असर और युवाओं की चिंता

देशभर के युवा, जो EPFO जैसे प्रतिष्ठित संगठनों में करियर बनाना चाहते हैं, इस निर्णय को लेकर चिंतित हैं। यदि यह नीति वैध ठहराई जाती है, तो अन्य सरकारी नौकरियों में भी NIRF या इसी तरह की रैंकिंग आधारित अंक प्रणाली लागू की जा सकती है। यह उन छात्रों के लिए असमान परिस्थिति पैदा कर सकती है, जो प्रतिष्ठित कॉलेजों में पढ़ाई नहीं कर सके लेकिन योग्यता रखते हैं।

यह भी देखें: सिर्फ 1 मिस्ड कॉल में पता करें PF बैलेंस, EPFO ने दिया आसान तरीका – जानें SMS से भी कैसे मिलेगी पूरी डिटेल

हमारे Whatsaap चैनल से जुड़ें