
Employees’ Provident Fund Organisation (EPFO) के तहत आने वाले लाखों कर्मचारियों के लिए एक अच्छी खबर सामने आ सकती है। लंबे समय से निजी क्षेत्र के कर्मचारी न्यूनतम पेंशन बढ़ाने की मांग कर रहे हैं। 2014 में केंद्र सरकार ने Employees’ Pension Scheme (EPS) के तहत न्यूनतम पेंशन 1000 रुपये तय की थी। अब खबर है कि यह पेंशन 7500 रुपये तक बढ़ाई जा सकती है। यह फैसला निजी कर्मचारियों के आर्थिक हालात को बेहतर बना सकता है।
ईपीएफओ और पेंशन योगदान का गणित
EPF के तहत कर्मचारी अपनी बेसिक सैलरी का 12% Provident Fund में जमा करते हैं, जबकि नियोक्ता भी समान राशि का योगदान करता है। इस राशि का 8.33% हिस्सा EPS में जाता है और 3.67% हिस्सा EPF खाते में जमा किया जाता है। मौजूदा पेंशन प्रणाली को देखते हुए, EPS-95 आंदोलन समिति (EPS-95 Agitation Committee) ने सरकार से न्यूनतम पेंशन में वृद्धि की मांग की है। केंद्रीय श्रम मंत्री मनसुख मंडाविया ने इस विषय पर जल्द कार्यवाही का आश्वासन दिया है।
EPS-95 आंदोलन समिति और उनकी मांगें
देशभर में ईपीएफओ के तहत आने वाले 78 लाख से ज्यादा पेंशनभोगियों की लंबे समय से लंबित मांगों को अब केंद्र सरकार गंभीरता से ले रही है। पेंशनभोगियों की प्रमुख मांगें इस प्रकार हैं:
- न्यूनतम पेंशन को बढ़ाकर 7500 रुपये किया जाए।
- पेंशनभोगियों और उनके जीवनसाथी के लिए मुफ्त चिकित्सा सुविधा दी जाए।
- उच्च पेंशन लाभ के आवेदनों में हुई त्रुटियों को सुधारा जाए।
- महंगाई भत्ता (DA) को पेंशन में शामिल किया जाए।
EPS-95 आंदोलन समिति के अनुसार, श्रम मंत्री ने इस संबंध में जल्द निर्णय लेने का आश्वासन दिया है, जिससे यह उम्मीद की जा रही है कि 10 साल बाद न्यूनतम पेंशन में बदलाव देखने को मिलेगा।
क्या बजट 2025 में मिलेगी राहत?
बजट 2025 से पहले EPS-95 सेवानिवृत्त कर्मचारियों का प्रतिनिधिमंडल वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण से मिला और पेंशन में वृद्धि की मांग रखी। वे चाहते हैं कि मौजूदा 1000 रुपये की पेंशन को 7500 रुपये तक बढ़ाया जाए और इसके साथ ही DA का लाभ भी जोड़ा जाए। बढ़ती महंगाई और मेडिकल खर्चों को देखते हुए यह मांग तर्कसंगत मानी जा रही है।
EPFO की आगामी बैठक में क्या होगा?
28 फरवरी 2025 को EPFO के Central Board of Trustees (CBT) की बैठक होने वाली है। इस बैठक में वित्तीय वर्ष 2024-25 के लिए भविष्य निधि जमा पर ब्याज दर तय की जाएगी। हालांकि, इस बैठक में पेंशन बढ़ोतरी का मुद्दा भी चर्चा का केंद्र बन सकता है।
वर्तमान में पेंशन राशि को अपर्याप्त बताते हुए सामाजिक कार्यकर्ता और पेंशनभोगी सरकार से इसे बढ़ाने की मांग कर रहे हैं। मौजूदा परिस्थितियों को देखते हुए सरकार पर इस विषय में जल्द निर्णय लेने का दबाव बढ़ गया है।
क्या EPFO पर लागू होगी स्थिर ब्याज दर?
सरकार EPFO खाताधारकों के लिए स्थिर ब्याज दर लागू करने पर विचार कर रही है ताकि बाजार में उतार-चढ़ाव के बावजूद खाताधारकों को निश्चित रिटर्न मिल सके।
क्या सरकार Interest Stabilization Fund बनाएगी?
Economic Times की रिपोर्ट के अनुसार, सरकार EPFO के लिए “Interest Stabilization Reserve Fund” बनाने की योजना पर विचार कर रही है। इसका उद्देश्य खाताधारकों को निवेश प्रदर्शन के बावजूद स्थिर ब्याज दर प्रदान करना है। श्रम एवं रोजगार मंत्रालय इस प्रस्ताव की व्यवहार्यता का अध्ययन कर रहा है।
2024-25 के लिए EPFO ब्याज दर क्या होगी?
मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, EPFO वित्त वर्ष 2024-25 के लिए ब्याज दर 8% से 8.25% के बीच रख सकता है।
CBT बैठक में क्या बड़े फैसले होंगे?
CBT (Central Board of Trustees) EPFO का सर्वोच्च निर्णय लेने वाला निकाय है, जिसकी अध्यक्षता केंद्रीय श्रम एवं रोजगार मंत्री करते हैं। इसमें नियोक्ता संघ, ट्रेड यूनियन और केंद्र व राज्य सरकार के अधिकारी शामिल होते हैं।
ब्याज दर निर्धारण की प्रक्रिया:
- EPFO ब्याज दर का प्रस्ताव रखता है।
- CBT इस प्रस्ताव की समीक्षा करता है और इसे मंजूरी देता है।
- इसके बाद इसे वित्त मंत्रालय से अंतिम स्वीकृति मिलती है।
- स्वीकृति मिलने के बाद यह ब्याज दर खाताधारकों के खाते में जमा की जाती है।
2023-24 के लिए EPFO ब्याज दर
वित्तीय वर्ष 2023-24 के लिए, EPFO ने ब्याज दर को 8.15% से बढ़ाकर 8.25% किया था। आगामी बैठक में ब्याज दर में किसी भी बदलाव पर अंतिम निर्णय लिया जाएगा।