
EPF यानी Employees’ Provident Fund से जुड़े लाखों कर्मचारियों के लिए एक बड़ी राहत भरी खबर सामने आ रही है। सरकार अब EPF में वेज लिमिट को ₹15,000 से बढ़ाकर ₹21,000 करने पर विचार कर रही है। अगर यह प्रस्ताव लागू होता है, तो इससे उन कर्मचारियों को सीधा फायदा मिलेगा जिनका बेसिक वेतन ₹15,000 से अधिक है लेकिन अभी EPS (Employees’ Pension Scheme) के तहत नहीं आते। यह बदलाव EPF और EPS दोनों में योगदान और रिटायरमेंट फंड को सीधे प्रभावित करेगा।
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EPS में बढ़ा योगदान, पेंशन में होगा दमदार इजाफा
वर्तमान में EPS योजना के अंतर्गत अधिकतम ₹1,250 प्रति माह का योगदान होता है, जो ₹15,000 की वेतन सीमा पर आधारित है। अगर सरकार इसे ₹21,000 तक बढ़ा देती है, तो EPS में कर्मचारी और नियोक्ता दोनों का योगदान बढ़कर ₹1,749 प्रति माह हो सकता है। इससे रिटायरमेंट के बाद मिलने वाली पेंशन में भी बड़ा इजाफा होगा। 35 वर्षों की सेवा के बाद वर्तमान अनुमानित पेंशन ₹7,500 से बढ़कर लगभग ₹10,050 प्रति माह तक पहुंच सकती है। यह उन कर्मचारियों के लिए एक बड़ी आर्थिक सुरक्षा बन सकती है जो लंबे समय से संगठित क्षेत्र में काम कर रहे हैं।
EPF कॉन्ट्रीब्यूशन और रिटायरमेंट फंड में बड़ा बदलाव
अगर किसी कर्मचारी का बेसिक वेतन ₹21,000 होता है, तो EPF के तहत उसका 12% यानी ₹2,520 का मासिक योगदान होगा। इतना ही योगदान नियोक्ता को भी देना होगा। हालांकि, नियोक्ता के हिस्से का एक बड़ा भाग EPS में जाएगा और शेष EPF में जमा होगा। इस तरह न केवल मासिक कटौती बढ़ेगी, बल्कि सेवानिवृत्ति के समय EPF फंड में जमा राशि भी लाखों रुपये तक बढ़ सकती है। इसका सीधा असर कर्मचारी की फाइनेंशियल प्लानिंग और लॉन्ग टर्म सिक्योरिटी पर पड़ेगा।
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टेक-होम सैलरी होगी कम, लेकिन लॉन्ग टर्म गेन ज्यादा
इस प्रस्ताव का एक संभावित नकारात्मक पहलू यह है कि टेक-होम सैलरी यानी हाथ में आने वाली राशि थोड़ी कम हो सकती है। क्योंकि EPF और EPS में अधिक योगदान कटेगा, जिससे तात्कालिक वेतन घटेगा। लेकिन लंबे समय में इससे मिलने वाला लाभ, जैसे रिटायरमेंट फंड और पेंशन, कहीं ज्यादा होगा। इसलिए यह एक ‘कम अभी, ज्यादा बाद में’ जैसा निवेश साबित हो सकता है, खासकर उन कर्मचारियों के लिए जो अपने रिटायरमेंट को लेकर गंभीर हैं।
नियोक्ताओं पर बढ़ेगा वित्तीय दबाव
इस बदलाव का असर सिर्फ कर्मचारियों तक सीमित नहीं रहेगा। नियोक्ताओं को भी प्रति कर्मचारी ज्यादा योगदान देना होगा, जिससे उनकी लागत में वृद्धि हो सकती है। हालांकि, इस पहल को सामाजिक सुरक्षा की दिशा में एक मजबूत कदम माना जा रहा है, जो निजी क्षेत्र में काम करने वाले कर्मचारियों को भविष्य के लिए अधिक सुरक्षा देगा।
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