
DA यानी महंगाई भत्ता सरकारी कर्मचारियों और पेंशनभोगियों के वेतन में वह अतिरिक्त राशि है जो उन्हें महंगाई के प्रभाव को संतुलित करने के लिए दी जाती है। यह भत्ता हर छह महीने में रिवाइज होता है, यानी साल में दो बार—जनवरी और जुलाई में इसकी समीक्षा की जाती है। इसका मुख्य उद्देश्य है कि कर्मचारियों की क्रय शक्ति पर महंगाई का असर न पड़े और वे अपने जीवन-स्तर को बनाए रख सकें।
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केंद्र सरकार कब करती है DA में बढ़ोतरी?
महंगाई भत्ते की समीक्षा केंद्र सरकार वर्ष में दो बार करती है, लेकिन इसकी घोषणा कभी-कभी विलंब से होती है। जैसे कि मार्च 2025 में सरकार ने 2% की बढ़ोतरी की घोषणा की, जो जनवरी 2025 से लागू मानी गई। इससे पहले DA 53% था, जो अब 55% हो गया है। इस बढ़ोतरी का सीधा लाभ लाखों केंद्रीय कर्मचारियों और पेंशनरों को मिलता है।
DA बढ़ोतरी का फॉर्मूला
DA की गणना ऑल इंडिया कंज्यूमर प्राइस इंडेक्स फॉर इंडस्ट्रियल वर्कर्स (AICPI-IW) के आधार पर की जाती है। श्रम मंत्रालय के अंतर्गत आने वाला लेबर ब्यूरो हर महीने CPI-IW के आंकड़े जारी करता है। सरकार इन आंकड़ों के छह महीने के औसत के आधार पर DA में बढ़ोतरी का प्रतिशत तय करती है। CPI-IW देश के अलग-अलग हिस्सों में रहने वाले औद्योगिक श्रमिकों के खर्च के आधार पर महंगाई को मापता है।
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DA बढ़ने से वेतन पर कितना होता है असर?
DA में हर एक फीसदी की बढ़ोतरी का सीधा असर कर्मचारियों के कुल वेतन पर पड़ता है। उदाहरण के लिए, अगर किसी कर्मचारी का बेसिक पे 50,000 रुपये है और DA 55% है, तो उसे 27,500 रुपये महंगाई भत्ते के रूप में मिलेंगे। पहले 53% की दर से यह राशि 26,500 रुपये थी। यानी हर महीने की आय में 1,000 रुपये की वृद्धि।
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