
सरकारी कर्मचारियों के लिए एक बड़ी राहत की खबर आई है। पुरानी पेंशन योजना (OPS) को लेकर लंबे समय से जारी बहस और विरोध प्रदर्शन के बीच सरकार ने एक महत्वपूर्ण निर्णय लिया है। कर्मचारी संगठनों की लगातार मांगों और दबाव के चलते, कुछ राज्यों ने अपने कर्मचारियों के लिए इस योजना को फिर से लागू करने का फैसला लिया है। यह फैसला उन लाखों कर्मचारियों के लिए राहतभरा हो सकता है जो नई पेंशन योजना (NPS) के अंतर्गत आने से असंतुष्ट थे और OPS की बहाली की मांग कर रहे थे।
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पुरानी पेंशन योजना बहाली पर सरकार का रुख
केंद्र सरकार ने अब तक OPS की बहाली पर कोई अंतिम निर्णय नहीं लिया है, लेकिन कुछ राज्य सरकारों ने इस दिशा में कदम उठाए हैं। उत्तर प्रदेश सरकार ने हाल ही में 28 मार्च 2005 से पहले विज्ञापित नौकरियों के लिए चयनित कर्मचारियों को पुरानी पेंशन योजना का लाभ देने का फैसला किया। इसके अलावा, कई अन्य राज्यों में भी इस योजना को दोबारा लागू करने पर विचार किया जा रहा है।
इस फैसले के बाद सरकारी कर्मचारियों में उम्मीद जगी है कि केंद्र सरकार भी इस मामले में कोई ठोस निर्णय ले सकती है। कर्मचारी संगठन लगातार अपनी मांगें सरकार तक पहुंचाने में जुटे हुए हैं। ऑल इंडिया ट्रेड यूनियन कांग्रेस (AITUC) और पेंशन बहाली संघर्ष समिति जैसी संस्थाएं OPS को फिर से लागू कराने के लिए सरकार पर दबाव बना रही हैं।
कर्मचारी संगठनों की भूमिका
सरकारी कर्मचारियों की ओर से लगातार आंदोलन और प्रदर्शन किए जा रहे हैं। AITUC ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को एक पत्र लिखकर OPS की बहाली की अपील की है। इसी तरह, हरियाणा में पेंशन बहाली संघर्ष समिति ने भी केंद्र सरकार को ज्ञापन सौंपा है। कर्मचारियों का तर्क है कि NPS के तहत उन्हें पर्याप्त सुरक्षा नहीं मिल रही है और OPS से ही उन्हें सेवानिवृत्ति के बाद वित्तीय स्थिरता मिल सकती है।
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विशेषज्ञों का मानना है कि अगर OPS को पुनः लागू किया जाता है तो यह कर्मचारियों के लिए एक बड़ी राहत होगी। कई राज्यों में OPS को लेकर अध्ययन और समीक्षा की जा रही है, जिससे यह तय किया जा सके कि इसे दोबारा लागू करने के क्या आर्थिक और प्रशासनिक प्रभाव होंगे।
आर्थिक प्रभाव और सरकार की योजना
OPS को बहाल करने से सरकारी खजाने पर भारी वित्तीय बोझ पड़ सकता है। यही कारण है कि केंद्र सरकार अब तक इसे पुनः लागू करने के निर्णय से बचती रही है। वित्तीय विशेषज्ञों का कहना है कि NPS को जारी रखने से सरकार के वित्तीय संसाधनों पर कम दबाव पड़ता है, जबकि OPS में कर्मचारियों को जीवनभर पेंशन दी जाती है, जिससे सरकारी खर्च बढ़ जाता है।
हालांकि, कर्मचारियों का मानना है कि OPS एक स्थायी समाधान है जो उन्हें भविष्य में आर्थिक सुरक्षा देता है। कुछ राज्य सरकारें इस दिशा में आगे बढ़ रही हैं और केंद्र सरकार भी जल्द ही इस पर कोई बड़ा फैसला ले सकती है।
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