
Union Budget 2025 की उल्टी गिनती शुरू हो चुकी है और पूरे देश की निगाहें वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण पर टिकी हैं, जो 1 फरवरी को देश की वित्तीय दिशा तय करेंगी। इस साल के बजट को लेकर कई तरह की अटकलें हैं, लेकिन सबसे ज्यादा चर्चा कर्मचारी भविष्य निधि संगठन यानी EPFO पेंशनर्स के बीच संभावित पेंशन वृद्धि को लेकर हो रही है।
पेंशनर्स की वर्षों पुरानी आस
EPFO के तहत वर्तमान में मिलने वाली न्यूनतम पेंशन ₹1,000 प्रति माह है, जो लंबे समय से आलोचना का विषय रही है। पेंशनर्स और उनसे जुड़ी संस्थाएं लगातार इस मुद्दे को उठाती रही हैं कि यह राशि बढ़ती महंगाई और जीवन यापन के लिहाज से नाकाफी है। कई पेंशनर्स ने अपनी ज़िंदगी के चार दशक इस फंड में योगदान देकर बिताए हैं, लेकिन अब उन्हें इतनी कम राशि पर गुज़ारा करना पड़ रहा है।
बजट 2025 से उम्मीद की जा रही है कि सरकार इस न्यूनतम पेंशन को ₹7,500 प्रति माह तक बढ़ा सकती है। अगर यह घोषणा होती है तो यह लाखों पेंशनर्स के लिए एक राहत की सांस होगी, जिससे वे अपने रोज़मर्रा के खर्चों को बेहतर ढंग से संभाल पाएंगे।
विशेषज्ञों की राय
आर्थिक मामलों के जानकारों के अनुसार, सरकार को पेंशन प्रणाली में सुधार को प्राथमिकता देनी चाहिए। उनका मानना है कि पेंशन की वर्तमान राशि न केवल अपर्याप्त है बल्कि यह उन करोड़ों लोगों के जीवन भर के योगदान का अपमान भी है जिन्होंने राष्ट्र के निर्माण में अहम भूमिका निभाई है।
एक अनुभवी विश्लेषक ने कहा, “यह केवल एक आर्थिक मामला नहीं है, बल्कि यह नैतिक जिम्मेदारी भी है कि हम उन लोगों को सम्मानजनक जीवन जीने का अवसर दें जिन्होंने अपना संपूर्ण करियर देश की सेवा में लगा दिया।”
नीतियों के पीछे छुपा मानवीय पहलू
जब हम पेंशन वृद्धि की बात करते हैं, तो यह केवल आंकड़ों की बात नहीं होती, बल्कि यह लाखों बुजुर्गों की ज़िंदगी से जुड़ा मसला है। जैसे कि श्री रमेश कुमार, एक सेवानिवृत्त फैक्ट्री कर्मचारी, बताते हैं, “40 साल की मेहनत के बाद अगर पेंशन बढ़ती है, तो इससे आत्मसम्मान से जीने का मौका मिलेगा। फिर बार-बार बच्चों पर निर्भर रहना नहीं पड़ेगा।”
इस कदम से न केवल पेंशनर्स को राहत मिलेगी बल्कि उनके परिवारों पर पड़ने वाला आर्थिक बोझ भी कुछ हद तक कम होगा। साथ ही यह हमारे बुजुर्गों को वह सम्मान देगा, जिसके वे हकदार हैं।
सरकार की चुनौती
हालांकि पेंशन बढ़ाने की यह मांग तार्किक और मानवीय दृष्टिकोण से जरूरी है, परंतु सरकार के सामने बजट संतुलन बनाए रखने की भी चुनौती है। हर साल बजट में विभिन्न वर्गों की जरूरतों को संतुलित करना आसान नहीं होता, खासकर तब जब राजकोषीय अनुशासन को भी बनाए रखना हो।
कुछ अर्थशास्त्री सुझाव देते हैं कि यदि पेंशन बढ़ाई जाती है, तो उसके लिए एक स्थायी और व्यावहारिक मॉडल तैयार करना आवश्यक है ताकि अन्य महत्वपूर्ण आर्थिक योजनाएं प्रभावित न हों।
क्या होगा आगे?
जैसे-जैसे बजट की तारीख नज़दीक आ रही है, वैसे-वैसे पेंशनर्स की उम्मीदें भी परवान चढ़ रही हैं। क्या इस बार उनके लिए कोई खुशखबरी लेकर आएगी Union Budget 2025? यह जानने के लिए देश की एक बड़ी आबादी बेसब्री से इंतज़ार कर रही है।
आर्थिक विशेषज्ञों और आम जनता दोनों की नजरें इस बार के बजट पर टिकी हैं। यह बजट न केवल आर्थिक दिशा तय करेगा, बल्कि लाखों बुजुर्गों के जीवन की दिशा भी बदल सकता है।