
सातवें वेतन आयोग (7th Pay Commission) की सिफारिशों ने केंद्र सरकार के लाखों कर्मचारियों की वेतन व्यवस्था में एक नई दिशा दी है। इस आयोग की अनुशंसा पर सरकार ने कई महत्वपूर्ण भत्तों को या तो समाप्त कर दिया है या उनमें संशोधन कर उन्हें मौजूदा आर्थिक परिदृश्य के अनुसार और अधिक प्रभावी बनाया है। इसका उद्देश्य सिर्फ वेतन संरचना को सरल बनाना नहीं, बल्कि कर्मचारियों को महंगाई के प्रभाव से कुछ राहत देना भी है।
समाप्त किए गए प्रमुख भत्ते
सातवें वेतन आयोग की समीक्षा के बाद कई पुराने भत्तों को समाप्त कर दिया गया है, जो अब प्रासंगिक नहीं माने जा रहे थे। इनमें अधिकारियों को मिलने वाला फर्नीचर भत्ता प्रमुख है, जिसे अब बंद कर दिया गया है। इसी तरह साक्षात्कार भत्ता, जो पहले विभिन्न चयन प्रक्रियाओं में हिस्सा लेने वाले कर्मचारियों को दिया जाता था, अब इसे भी हटा दिया गया है। इसके अलावा, अध्यक्षता भत्ता को भी समाप्त कर दिया गया है, जो कि विशेष जिम्मेदारियों के निर्वहन पर दिया जाता था। इन भत्तों को हटाने के पीछे तर्क यही है कि इनका वर्तमान परिप्रेक्ष्य में कोई सीधा लाभ नहीं दिख रहा था।
वृद्धि किए गए भत्तों का नया स्वरूप
जहाँ कुछ भत्ते समाप्त किए गए, वहीं कई भत्तों में संशोधन कर उन्हें बढ़ाया गया है, जिससे कर्मचारियों को प्रत्यक्ष लाभ हुआ है। सबसे पहले बात करते हैं महंगाई भत्ता (Dearness Allowance – DA) की। हाल ही में केंद्र सरकार ने इसमें 2% की वृद्धि की घोषणा की है, जिससे यह 53% से बढ़कर 55% हो गया है। यह वृद्धि महंगाई दर के बढ़ते प्रभाव को देखते हुए की गई है और कर्मचारियों के मासिक वेतन में सीधा जुड़ती है।
मकान किराया भत्ता (House Rent Allowance – HRA) में भी बदलाव किया गया है। नई व्यवस्था के तहत यह अब 24%, 16%, और 8% की दरों पर दिया जा रहा है, जो पहले क्रमशः 30%, 20%, और 10% था। यह संशोधन कुछ क्षेत्रों में कर्मचारियों के लिए थोड़ी असुविधा का कारण हो सकता है, लेकिन सरकार का दावा है कि नए फॉर्मूले से इसे संतुलित रखा गया है।
परिवहन भत्ता (Transport Allowance) में भी संशोधन कर इसे ज्यादा व्यावहारिक और कर्मचारी अनुकूल बनाया गया है। इस भत्ते में वृद्धि से कर्मचारियों को दैनिक यात्रा व्यय के बोझ से कुछ राहत मिलेगी, खासकर मेट्रो शहरों में कार्यरत कर्मचारियों को।
सरकार की मंशा
इन सभी परिवर्तनों का मुख्य उद्देश्य है सरकारी वेतन प्रणाली को सरल, पारदर्शी और आधुनिक जरूरतों के अनुरूप बनाना। कई पुराने भत्ते समय के साथ अप्रासंगिक हो गए थे और उनका बोझ सरकारी कोष पर भी था। वहीं, बढ़ते महंगाई और जीवनशैली की लागत को देखते हुए आवश्यक भत्तों में बढ़ोतरी कर कर्मचारियों की क्रय शक्ति को बनाए रखने की कोशिश की गई है।