
Tribal Area और Hill Area में पोस्टिंग पर सरकारी कर्मचारियों को विशेष भत्ते दिए जाते हैं। ये Allowance उन कठिन परिस्थितियों की भरपाई के लिए होते हैं, जिनका सामना कर्मचारी इन दुर्गम क्षेत्रों में करते हैं। जहां एक ओर पहाड़ी इलाकों में मौसम और पहुंच की चुनौतियां होती हैं, वहीं दूसरी ओर जनजातीय क्षेत्रों में सामाजिक और बुनियादी ढांचे की कमी एक बड़ी समस्या होती है। सरकार इन कारकों को ध्यान में रखते हुए कर्मचारियों को अतिरिक्त वित्तीय सहायता के रूप में भत्ते प्रदान करती है।
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पहाड़ी क्षेत्रों में मिलने वाला विशेष भत्ता
Hill Area में कार्यरत कर्मचारियों को ‘विशेष प्रतिपूरक भत्ता’ (Special Compensatory Allowance) दिया जाता है। यह भत्ता उस क्षेत्र की ऊँचाई और जीवन की कठिनाई के स्तर के अनुसार तय होता है। उदाहरण के तौर पर, समुद्र तल से 1,000 मीटर या उससे अधिक ऊँचाई वाले क्षेत्रों में ₹300 प्रति माह तक का भत्ता दिया जाता है। यह भत्ता एक तरह से उन कर्मचारियों के लिए प्रोत्साहन होता है जो अपने आरामदायक जीवन को छोड़कर दूरस्थ और दुर्गम क्षेत्रों में सेवा दे रहे होते हैं।
जनजातीय क्षेत्रों में मिलने वाला अतिरिक्त सहयोग
Tribal Area में कार्यरत कर्मचारियों को ‘जनजातीय क्षेत्र भत्ता’ दिया जाता है, जो कि ₹200 प्रति माह तक हो सकता है। यह भत्ता विभिन्न राज्यों में अलग-अलग दरों पर लागू होता है। मध्य प्रदेश, तमिलनाडु, उत्तर प्रदेश, कर्नाटक, त्रिपुरा, असम, पश्चिम बंगाल, बिहार और ओडिशा जैसे राज्यों में यह लागू है। इस भत्ते का उद्देश्य उन कर्मचारियों को प्रोत्साहित करना है जो सामाजिक रूप से पिछड़े और विकास से वंचित इलाकों में कार्य करते हैं।
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अन्य कठिन क्षेत्र आधारित भत्ते
सरकार केवल Tribal और Hill Areas तक ही सीमित नहीं है, बल्कि अन्य भौगोलिक परिस्थितियों को भी ध्यान में रखकर कर्मचारियों को अतिरिक्त भत्ते देती है। इनमें सीमा क्षेत्र भत्ता (Border Area Allowance), दुर्गम क्षेत्र भत्ता (Remote Area Allowance) और अशांत क्षेत्र भत्ता (Disturbed Area Allowance) शामिल हैं।
इन सभी भत्तों की दरें और पात्रता संबंधित राज्य सरकारों या केंद्र सरकार की नीति के आधार पर तय होती हैं। ये भत्ते सुनिश्चित करते हैं कि कर्मचारी अपने कर्तव्यों का निर्वहन करते समय आर्थिक रूप से सुरक्षित महसूस करें।
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