
वित्तीय वर्ष 2024-25 (असेसमेंट ईयर 2025-26) के लिए TDS यानि टैक्स डिडक्शन ऐट सोर्स (Tax Deduction at Source) के नियमों में कोई बड़ा बदलाव नहीं हुआ है, लेकिन हर टैक्सपेयर के लिए यह समझना जरूरी है कि अलग-अलग आय स्रोतों पर कितना TDS कटेगा। चाहे वह सैलरी हो, बैंक FD का ब्याज, किराए की इनकम हो या प्रोफेशनल सर्विस से होने वाली कमाई—हर सेक्शन का अलग नियम है। इस लेख में हम आपको TDS रेट चार्ट के जरिए यह स्पष्ट रूप से बताएंगे कि किस पर कितनी कटौती होगी और किन मामलों में अतिरिक्त सावधानी बरतनी चाहिए।
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सैलरी पर TDS की गणना कैसे होती है
सेक्शन 192 के तहत सैलरी इनकम पर TDS की कटौती आपकी टैक्स स्लैब के आधार पर होती है। इसका मतलब है कि अगर आपकी कुल वार्षिक इनकम टैक्सेबल लिमिट से ऊपर जाती है, तो आपके एम्प्लॉयर द्वारा उसी अनुपात में आपकी सैलरी से TDS काट लिया जाता है। एम्प्लॉयर आपकी अनुमानित सालाना इनकम, HRA, स्टैंडर्ड डिडक्शन और अन्य छूटों को ध्यान में रखते हुए TDS की गणना करता है। New Tax Regime और Old Tax Regime के चुनाव के अनुसार भी TDS की राशि में अंतर आता है।
FD पर कितना TDS कटता है
बैंक और पोस्ट ऑफिस में जमा Fixed Deposit (FD) पर मिलने वाले ब्याज पर भी TDS लागू होता है। सेक्शन 194A के तहत यदि आपकी वार्षिक ब्याज आय ₹40,000 से ज्यादा (वरिष्ठ नागरिकों के लिए ₹50,000) है, तो 10% की दर से TDS कटेगा। यदि आपने बैंक में अपना PAN नंबर नहीं दिया है, तो TDS की दर 20% तक जा सकती है। कई बार लोग यह भूल जाते हैं कि FD के ब्याज पर TDS अलग से कटता है, जो रिटर्न फाइलिंग के वक्त रिफंड या एडजस्टमेंट की स्थिति बना सकता है।
रेंट की इनकम पर TDS का नियम
अगर आप रेंट से इनकम कमा रहे हैं या किसी को किराया दे रहे हैं, तो सेक्शन 194-I और 194-IB के नियम लागू होते हैं। यदि कोई व्यक्ति साल में ₹2,40,000 से ज्यादा का किराया देता है, तो 10% TDS काटना अनिवार्य है (भूमि और भवन के लिए)। मशीनरी और उपकरणों के किराए पर TDS दर 2% है। वहीं, यदि कोई इंडिविजुअल या HUF, जो टैक्स ऑडिट के तहत नहीं आता, ₹50,000 से अधिक मासिक किराया भुगतान करता है, तो सेक्शन 194-IB के तहत 2% TDS लागू होता है।
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प्रोफेशनल फीस पर TDS कैसे काटा जाता है
यदि आपने किसी प्रोफेशनल को फीस दी है जैसे डॉक्टर, वकील, कंसल्टेंट या कोई तकनीकी सेवा प्रदान करने वाला विशेषज्ञ, और यह राशि ₹30,000 से अधिक है, तो सेक्शन 194J के तहत 10% की दर से TDS काटा जाएगा। यह नियम न केवल कंपनियों, बल्कि फर्म और अन्य संगठनों पर भी लागू होता है। इससे फ्रीलांसर और कॉन्ट्रैक्ट बेस्ड वर्क करने वाले प्रोफेशनल्स पर भी असर पड़ता है। समय पर TDS न काटने या जमा न करने पर भारी पेनल्टी भी लग सकती है।
PAN न देने पर बढ़ जाता है TDS का भार
Income Tax Act के अनुसार यदि किसी पेमेंट रिसीवर ने अपना PAN उपलब्ध नहीं कराया है, तो TDS की दर काफी बढ़ जाती है। ऐसे मामलों में आमतौर पर TDS की दर 20% तक हो जाती है। इसलिए यह जरूरी है कि अपना PAN समय पर अपडेट किया जाए और सभी वित्तीय संस्थानों को उपलब्ध कराया जाए।
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