2025 में सेक्शन 44AA, 44AB, 44AD, 44ADA के टैक्स नियमों में बड़े बदलाव—जानें कैसे होगा असर

सरकार ने छोटे कारोबारियों और पेशेवरों के लिए टैक्स की धारा 44AA, 44AB, 44AD, 44ADA में किए बड़े बदलाव—जानें कैसे बदल जाएंगे टैक्स ऑडिट, बहीखाता और अनुमानित आय के नियम। ये जानकारी जानना हर टैक्सपेयर्स के लिए बेहद जरूरी है!

rohit

Written by Rohit Kumar

Published on

2025 में सेक्शन 44AA, 44AB, 44AD, 44ADA के टैक्स नियमों में बड़े बदलाव—जानें कैसे होगा असर

सेक्शन 44AA

सेक्शन 44AA-Section 44AA में बदलाव से उन व्यवसायियों और पेशेवरों को राहत मिल सकती है जो अनुमानित आय योजना (Presumptive Income Scheme) का लाभ ले रहे हैं। यदि कोई टैक्सपेयर्स धारा 44AD या 44ADA के तहत टैक्स चुका रहा है, और उसकी आय अनुमानित दर से ज्यादा नहीं है, तो अब उसे विस्तृत बहीखाता रखने की अनिवार्यता से राहत मिलेगी। लेकिन यदि आय अनुमानित सीमा से कम घोषित की जाती है, तब भी बहीखाता रखना जरूरी होगा।

हमारे व्हॉट्सऐप चैनल से जुड़ें WhatsApp

यह भी देखें: EPFO भर्ती पर बवाल! दिल्ली हाईकोर्ट ने भर्ती नियमों पर उठाए सवाल, जारी किया नोटिस

हमारे व्हॉट्सऐप चैनल से जुड़ें WhatsApp

सेक्शन 44AB

सेक्शन 44AB-Section 44AB के अंतर्गत टैक्स ऑडिट की सीमा में 2025 से बड़ा बदलाव किया गया है। पहले जहाँ यह सीमा ₹1 करोड़ थी, अब यह बढ़ाकर ₹5 करोड़ कर दी गई है, लेकिन इसके लिए शर्त यह है कि नकद लेन-देन कुल कारोबार का 5% से अधिक नहीं होना चाहिए। यदि नकद लेन-देन 5% से ज्यादा है, तो पुरानी ₹1 करोड़ की सीमा ही लागू होगी। यह कदम डिजिटल ट्रांजैक्शन को बढ़ावा देने के लिए उठाया गया है।

सेक्शन 44AD

सेक्शन 44AD-Section 44AD का लाभ लेने वाले छोटे व्यापारियों के लिए टर्नओवर की सीमा अब ₹2 करोड़ से बढ़ाकर ₹3 करोड़ कर दी गई है, बशर्ते कुल लेन-देन में नकद का हिस्सा 5% से कम हो। इस धारा के अंतर्गत, नकद रसीदों पर 8% और डिजिटल रसीदों पर 6% की दर से आय मानी जाती है। यह उन कारोबारियों के लिए राहत की खबर है जो डिजिटल माध्यम से व्यापार करते हैं।

यह भी देखें: EPS Pension: 10 साल की नौकरी के बाद EPFO से कितनी पेंशन मिलेगी? यहां जानें पूरी डिटेल

सेक्शन 44ADA

सेक्शन 44ADA-Section 44ADA में भी बदलाव किया गया है, जिससे वकील, डॉक्टर, आर्किटेक्ट और अन्य पेशेवरों को लाभ होगा। पहले जहाँ इस धारा के तहत आय की सीमा ₹50 लाख थी, अब इसे बढ़ाकर ₹75 लाख कर दिया गया है, वही शर्त लागू है कि नकद प्राप्तियां 5% से ज्यादा न हों। इस धारा में पेशेवरों को 50% आय स्वतः मान ली जाती है और उन्हें टैक्स ऑडिट या बहीखाते की जरूरत नहीं पड़ती।

नए नियमों का उद्देश्य और असर

इन संशोधनों का मुख्य उद्देश्य है डिजिटल लेन-देन को बढ़ावा देना और छोटे व्यापारियों एवं पेशेवरों के लिए कर अनुपालन को सरल बनाना। साथ ही इससे नकदी-आधारित व्यवस्था को हतोत्साहित किया गया है। सरकार चाहती है कि ज्यादा से ज्यादा व्यापारी और प्रोफेशनल्स Presumptive Taxation को अपनाएं जिससे टैक्स बेस बढ़े और कर प्रक्रिया आसान बने।

यह भी देखें: EPFO से पेंशन चाहिए? तुरंत करें यह जरूरी काम, नहीं तो होगी बड़ी दिक्कत

हमारे Whatsaap चैनल से जुड़ें