सरकारी नौकरी में घर बैठकर भी मिलते हैं पैसे! जानिए Leave Encashment का कमाल

सरकारी कर्मचारियों को रिटायरमेंट पर मिलती है Leave Encashment की मोटी रकम—अब प्राइवेट कर्मचारियों को भी मिल रहा ₹25 लाख तक का फायदा! टैक्स से लेकर फायदे तक जानिए हर जरूरी बात, जिसे जानकर आप भी अपनी छुट्टियों को बना सकते हैं कमाई का जरिया!

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Written by Rohit Kumar

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सरकारी नौकरी में घर बैठकर भी मिलते हैं पैसे! जानिए Leave Encashment का कमाल

सरकारी नौकरी में काम करने वालों को कई तरह की सुविधाएं मिलती हैं, जिनमें एक बेहद आकर्षक सुविधा है लीव इनकैशमेंट (Leave Encashment)। यह एक ऐसा लाभ है, जिसमें कर्मचारी अपनी बची हुई छुट्टियों के बदले में नकद राशि प्राप्त कर सकता है। यानी छुट्टियां ली भी नहीं और उनका पैसा भी मिल गया। खास बात ये है कि ये लाभ नौकरी के दौरान भी मिल सकता है और रिटायरमेंट या इस्तीफे के समय भी।

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सेवा के दौरान लीव इनकैशमेंट पर टैक्स नियम

अगर आप नौकरी में रहते हुए ही लीव इनकैशमेंट का लाभ लेते हैं, तो यह रकम आपकी सालाना आय का हिस्सा मानी जाती है और इस पर आपका इनकम टैक्स (Income Tax) स्लैब लागू होता है। हालांकि, धारा 89 (Section 89) के तहत कुछ हद तक टैक्स राहत मिल सकती है। इसके लिए जरूरी है कि आप टैक्स रिलीफ के लिए उचित फॉर्म भरें और उसे इनकम टैक्स रिटर्न के साथ दाखिल करें।

रिटायरमेंट या इस्तीफे के समय लीव इनकैशमेंट पर टैक्स छूट

जब कोई सरकारी कर्मचारी रिटायर होता है या नौकरी छोड़ता है, तो उस समय मिलने वाला लीव इनकैशमेंट पूरी तरह टैक्स-फ्री होता है। चाहे राशि कितनी भी हो, सरकारी कर्मचारियों (Government Employees) के लिए इसमें कोई टैक्स नहीं लगता। वहीं निजी क्षेत्र (Private Sector) के कर्मचारियों के लिए यह सीमा हाल ही में बढ़ाकर ₹25 लाख कर दी गई है, जो पहले ₹3 लाख थी। इससे रिटायरमेंट पर मिलने वाली यह राशि अब और अधिक लाभकारी बन गई है।

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कंपनी की नीति और लीव इनकैशमेंट

हर कंपनी की अपनी छुट्टियों की नीति होती है। कुछ कंपनियां सालाना छुट्टियों को अगले साल में जोड़ने देती हैं, जबकि कुछ एक निश्चित संख्या तक छुट्टियां स्टोर करने की अनुमति देती हैं। लीव इनकैशमेंट तभी संभव है जब आपकी कंपनी की नीति इसके पक्ष में हो। हालांकि, सरकारी संस्थानों में ये सुविधा अधिक पारदर्शी और सुनिश्चित रहती है।

टैक्स बचाने की योजना कैसे बनाएं

अगर आप लीव इनकैशमेंट से अच्छी-खासी रकम पा रहे हैं, तो टैक्स की योजना पहले से बना लेना समझदारी होगी। इस राशि पर कर देयता को कम करने के लिए धारा 10(10AA) और धारा 89 के प्रावधानों का लाभ उठाएं। फाइनेंशियल प्लानर या चार्टर्ड अकाउंटेंट की सलाह लेकर टैक्स देनदारी को कानूनी रूप से न्यूनतम किया जा सकता है।

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