इन कैश ट्रांजैक्शन पर इनकम टैक्स विभाग रखेगा नजर – जानिए कौन-कौन से हैं शामिल

इनकम टैक्स विभाग अब केवल इनकम ही नहीं, बल्कि हाई-वैल्यू खर्च और निवेशों पर भी नजर रखता है। Form 26AS, AIS और E-Campaign के माध्यम से डिपार्टमेंट यह सुनिश्चित करता है कि कोई टैक्स चोरी न कर सके। इस लेख में बताया गया है कि किन ट्रांजैक्शनों पर विभाग अलर्ट होता है और टैक्सपेयर्स को किन कदमों का पालन करना चाहिए।

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Written by Rohit Kumar

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इन कैश ट्रांजैक्शन पर इनकम टैक्स विभाग रखेगा नजर – जानिए कौन-कौन से हैं शामिल
Income tax department alert

इनकम टैक्स डिपार्टमेंट अब सिर्फ आपकी इनकम पर ही नहीं, बल्कि आपके खर्चों और निवेशों पर भी बारीकी से नजर रखता है। यदि आपने ITR फाइल नहीं किया है या अपनी इनकम को कम दिखाया है, लेकिन आपके द्वारा किए गए खर्च बड़े हैं, तो अब सावधान हो जाइए। Income Tax Department ने कई सरकारी एजेंसियों के साथ मिलकर डेटा साझा करना शुरू कर दिया है, जिससे वे ऐसे व्यक्तियों की पहचान कर सकें जो हाई-वैल्यू ट्रांजैक्शन तो कर रहे हैं लेकिन टैक्स नहीं भर रहे।

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हाई-वैल्यू ट्रांजैक्शन क्या होते हैं और क्यों हैं जरूरी?

हाई-वैल्यू ट्रांजैक्शन वे वित्तीय गतिविधियां होती हैं जो एक निश्चित राशि से अधिक होती हैं और जिन्हें रिपोर्ट करना आवश्यक होता है। ये जानकारियां Statement of Financial Transaction (SFT) के जरिए Form 61A या Form 61B में रिपोर्ट की जाती हैं। बैंक, पोस्ट ऑफिस, फिनटेक, म्यूचुअल फंड हाउस जैसी संस्थाएं हर वित्तीय वर्ष के अंत के बाद 31 मई तक इन लेन-देन की डिटेल्स CBDT को सौंपती हैं।

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इन ट्रांजैक्शनों में शामिल हैं:

  • ₹10 लाख से अधिक कैश जमा या निकासी
  • ₹30 लाख से अधिक की प्रॉपर्टी खरीद या बिक्री
  • ₹1 लाख से अधिक की क्रेडिट कार्ड बिल की कैश पेमेंट
  • ₹10 लाख से अधिक के म्यूचुअल फंड या शेयर में निवेश
  • विदेशी यात्रा या विदेशी करेंसी से संबंधित खर्च

इन सभी ट्रांजैक्शनों की जानकारी अब सीधे आपके Form 26AS और Annual Information Statement (AIS) में दिखाई देती है।

इनकम टैक्स विभाग द्वारा उठाए गए कदम

इनकम टैक्स डिपार्टमेंट ने Form 26AS को अपडेट कर अब उसमें Specified Financial Transactions (SFT) जोड़ दिए हैं। इसके अलावा Annual Information Statement (AIS) के माध्यम से अब हर टैक्सपेयर अपने सारे वित्तीय लेन-देन की एक जगह जानकारी देख सकता है।

साथ ही, अगर आप पिछले तीन वर्षों से ITR फाइल नहीं कर रहे हैं और आपने साल भर में ₹20 लाख से अधिक कैश निकाला है, तो बैंक को आप पर 2% TDS काटना होगा। यह दर ₹1 करोड़ से अधिक निकासी पर 5% तक जाती है।

2019 से एक और अहम नियम लागू है – अगर आपकी इनकम ₹2.5 लाख से कम भी है, लेकिन आपने साल भर में कोई हाई-वैल्यू ट्रांजैक्शन किया है, जैसे ₹1 करोड़ से अधिक का करंट अकाउंट ट्रांजैक्शन, ₹2 लाख से अधिक की विदेशी यात्रा या ₹1 लाख से ज्यादा का बिजली बिल, तो भी आपको ITR फाइल करना अनिवार्य है।

Form 26AS में दिखाई देने वाले SFT ट्रांजैक्शन पर क्या करें?

अगर आपके Form 26AS में कोई SFT ट्रांजैक्शन दिखाई दे रहा है, तो सबसे पहले उसकी पुष्टि करें कि वह जानकारी सही है या नहीं। उसके बाद ITR फाइल करते समय उस लेन-देन को सही तरीके से रिपोर्ट करें और उसका टैक्स सही से कैलकुलेट करें। किसी भी प्रकार की गलती या मिसमैच होने पर आपको इनकम टैक्स नोटिस मिल सकता है।

ई-कैंपेन (E-Campaign) क्या है और इसका जवाब कैसे दें?

इनकम टैक्स डिपार्टमेंट ने स्वैच्छिक अनुपालन के लिए एक नया तरीका अपनाया है – ई-कैंपेन। इसमें उन टैक्सपेयर्स को SMS या ईमेल भेजा जाता है जिन्होंने ITR फाइल नहीं किया है या जिनकी फाइलिंग में गड़बड़ियां हैं।

अगर आपको ऐसा SMS/E-mail मिला है, तो आप नीचे दिए गए स्टेप्स फॉलो करके जवाब दे सकते हैं:

  1. incometax.gov.in पर लॉगिन करें
  2. ‘Pending Actions’ > Compliance Portal > ‘e-Campaign’ पर जाएं
  3. संबंधित ई-कैंपेन को चुनें
  4. ‘Provide Feedback in AIS’ पर क्लिक करें
  5. संबंधित ट्रांजैक्शन को चुनकर उत्तर दें
  6. उत्तर में बताएं कि जानकारी सही है, आंशिक सही है, टैक्सेबल नहीं है, या किसी और वर्ष/PAN से संबंधित है

इसके अलावा Preliminary Response सेक्शन में आपको यह भी बताना होगा कि आपने ITR फाइल किया है या नहीं। यदि किया है, तो Acknowledgement Number, Filing Date आदि डिटेल्स भरनी होंगी।

Compliance Portal का इस्तेमाल क्यों जरूरी है?

Compliance Portal टैक्स नियमों का पालन करने के लिए बनाया गया एक डिजिटल प्लेटफॉर्म है, जहां आप बिना किसी दफ्तर जाए, ऑनलाइन सभी कार्य कर सकते हैं। समय पर और सही जवाब देकर आप न केवल नोटिस से बच सकते हैं, बल्कि देश की अर्थव्यवस्था में भी योगदान दे सकते हैं।

अगर आप इस प्रक्रिया को लेकर असमंजस में हैं, तो विशेषज्ञों की सहायता लें। AIS में दिए गए प्रत्येक ट्रांजैक्शन पर सही प्रतिक्रिया दें और अपना Preliminary Response जरूर सबमिट करें।

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