
House Rent Allowance (HRA) एक महत्वपूर्ण भत्ता है जो नौकरीपेशा कर्मचारियों को किराए के मकान में रहने की सुविधा को आर्थिक रूप से आसान बनाने के लिए दिया जाता है। यह भत्ता आमतौर पर कर्मचारी की Basic Salary का एक निश्चित प्रतिशत होता है और यह केवल किराए पर रहने वाले लोगों के लिए प्रासंगिक है। HRA का लाभ सिर्फ रहने का खर्च नहीं, टैक्स में छूट का एक बेहतरीन अवसर भी है।
🏙️ शहरों की श्रेणियां और HRA की दरें
सरकार ने 7th Pay Commission के अनुसार भारत के शहरों को जनसंख्या के आधार पर तीन प्रमुख श्रेणियों में विभाजित किया है: X, Y, Z।
- X श्रेणी (Metro Cities): जिनकी जनसंख्या 50 लाख से अधिक है, जैसे दिल्ली, मुंबई, बेंगलुरु आदि। इनमें HRA दर 30% होती है।
- Y श्रेणी: जिनकी जनसंख्या 5 लाख से अधिक लेकिन 50 लाख से कम है, जैसे जयपुर, लखनऊ, चंडीगढ़। इनमें HRA दर 20% होती है।
- Z श्रेणी: जिनकी जनसंख्या 5 लाख से कम है, यानी छोटे कस्बे और गांव। यहां HRA दर 10% होती है।
इन श्रेणियों के आधार पर HRA की गणना होती है, जिससे किराए के खर्च को आंशिक रूप से कवर किया जा सके।
🧮 HRA पर टैक्स छूट कैसे मिलती है?
Income Tax Act की धारा 10(13A) के अंतर्गत, HRA पर टैक्स छूट पाने के लिए निम्नलिखित तीन में से जो भी राशि सबसे कम हो, वही टैक्स फ्री होती है:
- आपको मिलने वाला वास्तविक HRA
- दिया गया किराया – Basic Salary का 10%
- मेट्रो शहर में रहने पर Basic Salary का 50% या नॉन-मेट्रो शहर में 40%
इसका अर्थ है कि आप जितना किराया देते हैं और जहां आप रहते हैं, वह आपकी टैक्स छूट को सीधे प्रभावित करता है। यदि आप किराए पर रहते हैं और HRA ले रहे हैं, तो आपको किराए की रसीद और मकान मालिक का PAN नंबर देना होगा यदि सालाना किराया ₹1 लाख से अधिक है।
👨💼 उदाहरण से बेहतर समझ
मान लीजिए आपकी स्थिति इस प्रकार है:
- Basic Salary: ₹40,000/माह
- HRA: ₹15,000/माह
- किराया: ₹12,000/माह
- शहर: बेंगलुरु (X कैटेगरी – मेट्रो)
अब टैक्स छूट की गणना करें:
- Actual HRA = ₹15,000
- Rent – 10% of Basic = ₹12,000 – ₹4,000 = ₹8,000
- 50% of Basic = ₹20,000
तीनों में से सबसे कम राशि ₹8,000 है → यही Tax Free HRA होगा।
💼 निजी कंपनियों में HRA की व्यवस्था
Private Sector में HRA की राशि कंपनी की HR नीति पर निर्भर करती है। हालांकि टैक्स छूट के लिए वही नियम लागू होते हैं जो सरकारी कर्मचारियों पर होते हैं। कई कंपनियां X, Y, Z कैटेगरी का पालन नहीं करतीं, लेकिन टैक्स छूट की गणना हमेशा सरकार द्वारा तय मापदंडों पर आधारित होती है।
यदि आप किराए के मकान में रहते हैं और HRA प्राप्त कर रहे हैं, तो यह जानना जरूरी है कि टैक्स छूट पाने के लिए जरूरी दस्तावेज और सही गणना से आप हर साल अच्छी-खासी राशि बचा सकते हैं।