
सरकारी सैलरी स्लिप हर सरकारी कर्मचारी को हर महीने दी जाती है, जिसमें उसके वेतन से जुड़े सभी विवरण होते हैं। इस सैलरी स्लिप में दिखाई देने वाले हर लाइन आइटम का एक विशिष्ट अर्थ होता है, जो कर्मचारी की कुल आय और कटौतियों को दर्शाता है। लेकिन बहुत से लोग इस स्लिप में लिखे आंकड़ों और शब्दों को समझ नहीं पाते। आइए विस्तार से समझते हैं कि सरकारी सैलरी स्लिप कैसे बनती है और इसमें क्या-क्या शामिल होता है।
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कर्मचारी की पहचान से शुरू होती है सैलरी स्लिप की प्रक्रिया
हर सैलरी स्लिप की शुरुआत कर्मचारी की बुनियादी जानकारी से होती है। इसमें नाम, पदनाम, विभाग, कर्मचारी कोड, पैन नंबर और बैंक खाता जैसी जानकारियाँ दर्ज होती हैं। यह सभी जानकारी यह सुनिश्चित करने के लिए होती है कि वेतन सही व्यक्ति को ट्रांसफर किया जा रहा है और रिकॉर्ड में कोई गलती न हो। साथ ही इसमें ईपीएफ-EPF और यूएएन-UAN नंबर भी दिए होते हैं जो भविष्य निधि और रिटायरमेंट से जुड़े होते हैं।
वर्किंग डेज और लीव का पूरा लेखा-जोखा
हर सैलरी स्लिप में महीने के कार्य दिवस, उपस्थिति, अवकाश और छुट्टियों की जानकारी शामिल होती है। इससे यह तय होता है कि वेतन फुल मिलेगा या किसी अनुपस्थिति की वजह से कटौती होगी। सरकारी कर्मचारियों को आमतौर पर अनुमत अवकाशों की सुविधा मिलती है, लेकिन अनधिकृत अनुपस्थिति वेतन पर असर डाल सकती है।
Earnings: आय के मुख्य स्रोत जो वेतन बनाते हैं मजबूत
सैलरी स्लिप में दिखने वाली “Earnings” यानी आय की श्रेणी सबसे महत्वपूर्ण होती है। इसमें बेसिक सैलरी-Basic Salary, महंगाई भत्ता-Dearness Allowance (DA), मकान किराया भत्ता-House Rent Allowance (HRA), यात्रा भत्ता-Conveyance Allowance, चिकित्सा भत्ता-Medical Allowance और कभी-कभी विशेष भत्ता-Special Allowance भी शामिल होता है।
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बेसिक सैलरी वह आधार है जिससे अधिकतर भत्तों और कटौतियों की गणना की जाती है। DA समय-समय पर महंगाई के अनुसार बढ़ाया जाता है, जबकि HRA व्यक्ति के शहर और रेंटिंग स्थिति पर निर्भर करता है।
Deductions: कटौतियों का ब्योरा जो सैलरी को करता है कम
Earnings के ठीक नीचे दिखता है “Deductions” का सेक्शन, जो बताता है कि किस कारण से आपकी कुल सैलरी में से कितनी राशि काटी गई है। इसमें मुख्य रूप से प्रोविडेंट फंड-PF, कर्मचारी राज्य बीमा-ESI, पेशेवर कर-Professional Tax और स्रोत पर कर कटौती-TDS शामिल होते हैं। PF और ESI कर्मचारियों के भविष्य और स्वास्थ्य सुरक्षा से जुड़े हैं, जबकि TDS आयकर के नियमों के अनुसार काटा जाता है।
Net Salary और Gross Salary में फर्क जानना बेहद जरूरी
सैलरी स्लिप में Gross Salary यानी कुल वेतन वह राशि होती है जो सभी भत्तों को जोड़ने के बाद मिलती है, जबकि Net Salary वह वास्तविक राशि है जो कटौतियों के बाद कर्मचारी के बैंक खाते में ट्रांसफर की जाती है। यही वो फिगर होता है जो आपको मिलती है, लेकिन अक्सर लोग Gross और Net के फर्क को नहीं समझ पाते।
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