
भारत में नौकरीपेशा लोगों को मिलने वाले अलाउंस की राशि इस बात पर निर्भर करती है कि वे किस श्रेणी के शहर में काम कर रहे हैं। टियर-1 शहरों यानी X-Class शहरों में नौकरी करने वालों को सबसे ज्यादा भत्ते मिलते हैं। इसकी वजह यहां की महंगाई, रहन-सहन की लागत और इन्फ्रास्ट्रक्चर का उच्च स्तर है। ऐसे शहरों में HRA, CCA और अन्य सुविधाओं की राशि अधिक होती है ताकि कर्मचारी अपने खर्चों को संभाल सकें।
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शहरों का वर्गीकरण और उसका महत्व
भारत सरकार ने शहरों को X, Y और Z वर्गों में बांटा है। X-Class यानी टियर-1 शहरों में अहमदाबाद, बेंगलुरु, चेन्नई, दिल्ली, हैदराबाद, कोलकाता, मुंबई और पुणे शामिल हैं। इन शहरों में न सिर्फ रोजगार के अवसर अधिक हैं बल्कि यहां जीवन यापन की लागत भी तुलनात्मक रूप से अधिक होती है। इसी कारण इन शहरों में काम करने वालों को ज्यादा अलाउंस दिए जाते हैं।
मकान किराया भत्ता (HRA) का प्रभाव
टियर-1 शहरों में काम करने वाले कर्मचारियों को मिलने वाला HRA आमतौर पर उनके बेसिक सैलरी का 50% होता है, जबकि Y और Z क्लास शहरों में यह 40% या उससे कम हो सकता है। चूंकि इन महानगरों में रेंट अधिक होता है, इसलिए कर्मचारियों को मकान किराए में राहत देने के लिए यह भत्ता बहुत अहम होता है।
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शहर प्रतिपूर्ति भत्ता (CCA) की भूमिका
City Compensatory Allowance यानी CCA, एक ऐसा भत्ता है जो विशेष रूप से महंगे शहरों में रहने वाले कर्मचारियों को आर्थिक राहत देने के लिए दिया जाता है। यह राशि नियोक्ता की नीति और शहर की महंगाई के स्तर पर निर्भर करती है। टियर-1 शहरों में यह भत्ता आमतौर पर अधिक होता है क्योंकि वहां रोजमर्रा की जरूरतें महंगी होती हैं।
अन्य भत्ते और सुविधाएं
इसके अलावा, टियर-1 शहरों में काम करने वाले कर्मचारियों को अन्य कई प्रकार के भत्ते और सुविधाएं मिलती हैं। इनमें यात्रा भत्ता, इंटरनेट और मोबाइल रीइम्बर्समेंट, भोजन भत्ता, स्वास्थ्य बीमा, जीवन बीमा और दुर्घटना बीमा शामिल हैं। कुछ कंपनियां विशेष रूप से Work From Home कर्मचारियों को भी इंटरनेट भत्ता देती हैं, जो अब Hybrid Work Culture में एक सामान्य प्रथा बन चुकी है।
महंगे शहरों में भत्तों की जरूरत क्यों बढ़ती है?
टियर-1 शहरों में महंगाई दर अधिक होती है, आवास महंगा होता है, स्कूल-हॉस्पिटल जैसी सेवाएं भी ज्यादा खर्चीली होती हैं। इसलिए कंपनियों को अपने कर्मचारियों को इन खर्चों से राहत दिलाने के लिए भत्तों की मदद लेनी पड़ती है। इससे न केवल कर्मचारियों की संतुष्टि बढ़ती है, बल्कि उनका प्रदर्शन भी बेहतर होता है।
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