खत्म होगा लंबा इंतजार? पेंशनभोगियों ने की ₹9000 मिनिमम पेंशन की डिमांड, सरकार का क्या है स्टैंड?

EPS-95 के पेंशनभोगी ₹9000 की न्यूनतम पेंशन और DA जैसे लाभों की मांग कर रहे हैं। सरकार इसे लेकर गंभीर दिखाई दे रही है और EPFO जल्द इस पर फैसला ले सकता है। ये कदम पेंशनभोगियों के लिए राहत का सबब बन सकते हैं।

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Written by Rohit Kumar

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खत्म होगा लंबा इंतजार? पेंशनभोगियों ने की ₹9000 मिनिमम पेंशन की डिमांड, सरकार का क्या है स्टैंड?

कर्मचारी पेंशन योजना (EPS-95) के तहत पेंशन लेने वाले लाखों पेंशनभोगी अब एकजुट होकर सरकार से न्यूनतम पेंशन को ₹1000 से बढ़ाकर ₹9000 प्रतिमाह करने की मांग कर रहे हैं। उनका कहना है कि मौजूदा पेंशन राशि न तो महंगाई का मुकाबला कर पा रही है और न ही जीवनयापन की बुनियादी जरूरतों को पूरा कर रही है। पेंशनधारकों का यह भी कहना है कि उन्हें महंगाई भत्ता (DA) और मुफ्त स्वास्थ्य सेवाएं भी मिलनी चाहिए।

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सरकार की प्रतिक्रिया और अब तक की पहल

पेंशनरों की इस मांग को लेकर सरकार पर दबाव लगातार बढ़ रहा है। बजट 2025-26 से पहले EPS-95 राष्ट्रीय संघर्ष समिति के प्रतिनिधियों ने वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण से मुलाकात कर इस मुद्दे को प्रमुखता से उठाया। हालांकि, बजट भाषण में इस पर कोई स्पष्ट ऐलान नहीं किया गया। इसके बावजूद, केंद्रीय श्रम मंत्री मनसुख मांडविया ने हाल ही में इस मुद्दे पर सकारात्मक रवैया अपनाते हुए समाधान की दिशा में जल्द कार्रवाई का भरोसा दिलाया है।

क्या सरकार बढ़ा सकती है न्यूनतम पेंशन?

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, सरकार कर्मचारी भविष्य निधि संगठन (EPFO) के माध्यम से EPS पेंशनर्स के लिए न्यूनतम गारंटीड पेंशन ₹7500 करने पर गंभीरता से विचार कर रही है। श्रम मंत्रालय इस पर एक नीति मसौदा तैयार कर रहा है जिसे EPFO के केंद्रीय न्यासी बोर्ड (CBT) की अगली बैठक में पेश किया जा सकता है। अगर यह प्रस्ताव पारित होता है, तो EPS-95 के तहत पेंशन ले रहे करीब 67 लाख से अधिक पेंशनभोगियों को सीधा लाभ मिलेगा।

पेंशनभोगियों की मांगें सिर्फ रकम तक सीमित नहीं

₹9000 की मांग के साथ-साथ पेंशनभोगी यह भी चाहते हैं कि उन्हें नियमित रूप से महंगाई भत्ता (DA) मिले, ठीक वैसे ही जैसे सरकारी कर्मचारियों और अन्य पेंशनरों को मिलता है। इसके अलावा, चिकित्सा सेवाओं के खर्चों को देखते हुए EPS पेंशनभोगी मुफ्त स्वास्थ्य सुविधाएं और आयुष्मान भारत जैसी योजनाओं में स्वत: समावेश की मांग कर रहे हैं। उनका मानना है कि यह उनका हक है, न कि कोई अनुकंपा।

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सरकार की दुविधा और आर्थिक गणना

सरकार के सामने सबसे बड़ी चुनौती है वित्तीय भार का आकलन। अगर न्यूनतम पेंशन ₹9000 कर दी जाती है, तो इस पर सालाना हजारों करोड़ रुपये का अतिरिक्त व्यय होगा। ऐसे में सरकार इसे एकसाथ लागू करने के बजाय चरणबद्ध तरीके से बढ़ाने पर विचार कर सकती है। इसके अलावा, EPFO को भी पेंशन कोष की स्थिरता बनाए रखने के लिए नई रणनीतियों की आवश्यकता होगी।

EPS स्कीम की समीक्षा

इस पूरी मांग के संदर्भ में EPS-95 स्कीम की संरचना पर भी सवाल उठ रहे हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि इस स्कीम में वर्षों से कोई बड़ा संशोधन नहीं हुआ है। बढ़ती जीवन प्रत्याशा, महंगाई और सामाजिक सुरक्षा की जरूरतों को देखते हुए अब EPS स्कीम में व्यापक बदलाव अनिवार्य हो गया है। सरकार भी इस दिशा में विचार कर रही है कि कैसे स्कीम को ज्यादा प्रभावी और स्थायी बनाया जाए।

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