
Income Tax Calculator 2025 के अनुसार यदि आपकी वार्षिक आय ₹12,75,000 तक है और आप नई कर व्यवस्था (New Tax Regime) का चयन करते हैं, तो आपकी टैक्स देनदारी शून्य हो सकती है। यह बदलाव वित्त वर्ष 2025-26 के बजट में सरकार द्वारा घोषित नई टैक्स स्लैब्स के तहत आया है। इन नए नियमों का उद्देश्य टैक्स प्रणाली को सरल बनाना और मध्यम वर्ग को अधिक कर राहत प्रदान करना है।
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कैसे ₹12 लाख की इनकम पर टैक्स शून्य हो जाता है?
यदि आपकी ग्रॉस इनकम ₹12,75,000 है, तो आपको नई कर व्यवस्था में ₹75,000 का स्टैंडर्ड डिडक्शन (Standard Deduction) स्वतः प्राप्त होता है। इसके बाद आपकी टैक्सेबल इनकम ₹12,00,000 रह जाती है। इस ₹12 लाख की इनकम पर पहले ₹4 लाख तक कोई टैक्स नहीं है, ₹4 लाख से ₹8 लाख तक 5% और ₹8 लाख से ₹12 लाख तक केवल 10% टैक्स लगता है। लेकिन यहां महत्वपूर्ण है धारा 87A के तहत मिलने वाली ₹60,000 की टैक्स छूट, जो आपके पूरे टैक्स को कवर कर लेती है, जिससे नेट टैक्स देनदारी शून्य हो जाती है।
अगर आय ₹12 लाख से अधिक हो तो टैक्स कैसे लगेगा?
अगर आपकी सालाना आय ₹12 लाख से कुछ अधिक यानी ₹13 लाख है, तो भी आप नई टैक्स व्यवस्था में अपेक्षाकृत कम टैक्स दे सकते हैं। इस स्थिति में ₹75,000 स्टैंडर्ड डिडक्शन के बाद टैक्स योग्य आय ₹12,25,000 बनती है। पहले ₹12 लाख पर आपको 87A की छूट मिलती है, लेकिन अतिरिक्त ₹25,000 पर 15% की दर से टैक्स देना होगा। इसका अर्थ है कि ₹13 लाख की इनकम पर भी आपकी टैक्स देनदारी केवल ₹3,750 रह जाएगी।
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नई बनाम पुरानी टैक्स व्यवस्था: कौन-सी चुनें?
पुरानी टैक्स व्यवस्था (Old Tax Regime) उन करदाताओं के लिए बेहतर हो सकती है जो विभिन्न कटौतियों और छूटों जैसे HRA, LTA, धारा 80C आदि का लाभ लेते हैं। वहीं, नई टैक्स व्यवस्था सरल है और बिना ज्यादा कागजी प्रक्रिया के कम टैक्स दरों का लाभ देती है। यदि आपकी इनकम स्ट्रक्चर साधारण है और आप ज्यादा निवेश नहीं करते, तो नई व्यवस्था आपके लिए अधिक लाभकारी हो सकती है।
सरकार की मंशा और करदाताओं को मिलने वाले लाभ
2025 की नई टैक्स नीति सरकार के उस विजन का हिस्सा है, जो देश में टैक्स प्रणाली को सरल, पारदर्शी और डिजिटल बनाने की दिशा में काम कर रहा है। इसका मुख्य उद्देश्य यह है कि अधिक लोग स्वेच्छा से टैक्स भरें और टैक्स नेट का विस्तार हो। साथ ही, यह नीति देश के मध्यम वर्ग को अधिक स्पेंडिंग कैपेसिटी देकर आर्थिक गतिविधियों को गति देने में मदद करती है।
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