
Employees’ Provident Fund यानी EPF एक महत्वपूर्ण रिटायरमेंट सेविंग स्कीम है, जो भारत में सैलेरीड कर्मचारियों के लिए वित्तीय सुरक्षा और टैक्स लाभ देती है। हालांकि, हर EPF निकासी टैक्स फ्री नहीं होती। EPF Withdrawal पर टैक्स कब लगता है और किस स्थिति में छूट मिलती है, इसे समझना एक बेहतर वित्तीय योजना के लिए ज़रूरी है।
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EPF एक अहम वित्तीय साधन है, जो रिटायरमेंट के बाद आर्थिक सुरक्षा और टैक्स लाभ प्रदान करता है। लेकिन पाँच साल से पहले की गई निकासी पर टैक्स लागू हो सकता है और कुछ विशेष स्थितियों में ब्याज पर भी टैक्स लग सकता है। टैक्स नियमों की सही समझ और निकासी की योजना बनाकर EPF का अधिकतम लाभ उठाया जा सकता है।
EPF Withdrawal पर टैक्स कब लगता है?
EPF Withdrawal टैक्स के अधीन तब आता है जब कर्मचारी सेवा की अवधि पांच साल से कम होती है, या फिर निकासी किसी विशेष परिस्थिति में की जाती है।
पांच साल से कम सेवा पर निकासी
अगर कोई कर्मचारी पाँच साल की निरंतर सेवा से पहले EPF अकाउंट से पैसा निकालता है, तो यह राशि टैक्सेबल होती है। ऐसी स्थिति में निकाली गई राशि को कर्मचारी की सालाना आय में जोड़ा जाता है और उस पर उसी टैक्स स्लैब के अनुसार टैक्स लगता है। साथ ही, सेक्शन 80C के तहत पहले लिए गए टैक्स डिडक्शन को भी रिवर्स किया जा सकता है।
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पांच साल की सेवा के बाद निकासी
अगर EPF से निकासी पाँच साल की निरंतर सेवा के बाद की जाती है, तो यह आमतौर पर टैक्स से मुक्त होती है। इस स्थिति में EPF का प्रिंसिपल अमाउंट और उस पर अर्जित ब्याज—दोनों टैक्स फ्री होते हैं। हालांकि, यह सुनिश्चित करना ज़रूरी है कि इन पाँच वर्षों के दौरान सेवा में कोई ब्रेक न आया हो, वरना टैक्स छूट प्रभावित हो सकती है।
ब्याज पर टैक्स
भले ही पाँच साल के बाद निकासी टैक्स फ्री हो, लेकिन कुछ स्थितियों में EPF ब्याज टैक्स योग्य हो सकता है। अगर EPF अकाउंट निष्क्रिय (Inoperative) हो जाता है और उस पर ब्याज मिल रहा है, या अगर ब्याज निर्धारित सीमा से अधिक है, तो अतिरिक्त ब्याज पर टैक्स लगाया जा सकता है। वर्तमान नियमों के अनुसार, Budget 2021 के बाद कर्मचारी की वार्षिक योगदान ₹2.5 लाख से अधिक होने पर उस पर अर्जित ब्याज टैक्स के दायरे में आता है।
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EPF टैक्स को प्रभावित करने वाले प्रमुख कारक
EPF Withdrawal पर टैक्स से संबंधित कई फैक्टर होते हैं जो इसके टैक्स ट्रीटमेंट को प्रभावित करते हैं।
निकासी का उद्देश्य
- अगर निकासी चिकित्सा आपातकाल, बेरोज़गारी या अन्य अनुमत कारणों के लिए की जाती है, तो टैक्स से छूट मिल सकती है, भले ही सेवा अवधि पाँच साल से कम हो। ऐसे मामलों में यह राहत कर्मचारी के लिए काफी मददगार हो सकती है।
टैक्स डिडक्शन एट सोर्स (TDS)
- यदि निकासी टैक्स योग्य है और ₹50,000 से अधिक है, तो EPFO द्वारा TDS 10% की दर से काटा जा सकता है। यदि कर्मचारी अपना PAN नहीं देता है, तो यह दर बढ़कर 30% तक हो सकती है। यह नियम सेक्शन 192A के अंतर्गत आता है, जो कि EPF Withdrawal पर TDS को अनिवार्य करता है।
EPF के विभिन्न घटक और उनका टैक्स ट्रीटमेंट
EPF में मुख्य रूप से तीन भाग होते हैं—EPF कंट्रीब्यूशन और उसका ब्याज, वॉलंटरी प्रोविडेंट फंड (VPF) और Employees’ Pension Scheme (EPS)।
EPF और VPF पर नियम एक जैसे हैं, जबकि EPS से मिलने वाली राशि आमतौर पर टैक्स फ्री होती है।
EPF Withdrawal को प्लान करने के लिए सुझाव
- EPF का अधिकतम लाभ उठाने और टैक्स दायित्वों को कम करने के लिए कुछ बातों का ध्यान रखना ज़रूरी है।
निरंतर सेवा बनाए रखें
- पाँच साल पूरे होने से पहले EPF निकालने से बचें। अगर नौकरी बदलते हैं, तो EPF अकाउंट को ट्रांसफर करें, निकालें नहीं।
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EPF योगदान और ब्याज पर नज़र रखें
कर्मचारी और नियोक्ता के योगदान पर नज़र रखने से निकासी के समय टैक्स दायित्व को समझना आसान होता है।
विशेषज्ञ से सलाह लें
टैक्स नियम समय-समय पर बदलते रहते हैं। एक टैक्स एक्सपर्ट या वित्तीय सलाहकार से मार्गदर्शन लेने से सही निर्णय लेने में मदद मिलती है।