Risk Posting? तो मिल सकता है डबल Allowance – जानिए किन जगहों पर तैनाती से बढ़ती है सैलरी

अगर आपकी तैनाती है इन खतरनाक इलाकों में, तो सैलरी में हो सकता है जबरदस्त उछाल! जानिए वो खास पोस्टिंग्स जहां एक जवान को मिलते हैं डबल Allowance और शानदार सुविधाएं – ये जानकारी चौंका देगी!

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Written by Rohit Kumar

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Risk Posting? तो मिल सकता है डबल Allowance – जानिए किन जगहों पर तैनाती से बढ़ती है सैलरी

Risk Posting एक ऐसा शब्द है जिसे सेना, अर्धसैनिक बलों और सुरक्षा एजेंसियों में तैनात कर्मचारियों के लिए विशेष महत्व दिया जाता है। इसका सीधा संबंध उस स्थान से होता है जहां तैनाती जोखिम से भरी होती है—चाहे वो दुश्मन की सीमा हो, उग्रवाद से प्रभावित क्षेत्र, ऊंचाई पर स्थित ठंडी पोस्टिंग या फिर दुर्गम इलाका। ऐसे स्थानों पर तैनात कर्मियों को डबल Allowance यानी अतिरिक्त वेतन भत्ता (Extra Salary Allowance) मिलता है ताकि वे कठिन परिस्थितियों में भी डटे रहें और उनका मनोबल ऊंचा बना रहे।

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Risk and Hardship Allowance की संरचना और श्रेणियां

भारतीय सेना और अर्धसैनिक बलों में रिस्क और हार्डशिप अलाउंस को विभिन्न श्रेणियों में विभाजित किया गया है। इनमें R1H1, R1H2 जैसी श्रेणियां शामिल हैं, जिनका निर्धारण तैनाती की कठिनाई और खतरे की तीव्रता के आधार पर किया जाता है। उदाहरण के लिए, रजौरी सेक्टर को सीएपीएफ (CAPF) के लिए R1H1 श्रेणी में रखा गया है जबकि सेना के लिए यह R1H2 में आता है। इस श्रेणी के अंतर के कारण मिलने वाले भत्तों में भी फर्क होता है, जिससे कुछ पोस्टिंग पर सैलरी लगभग दोगुनी तक हो सकती है।

सियाचिन जैसी पोस्टिंग्स और स्पेशल अलाउंस का महत्व

सियाचिन ग्लेशियर दुनिया का सबसे ऊंचा युद्धक्षेत्र है, जहां तापमान माइनस 60 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच जाता है। यहां की तैनाती को रिस्क पोस्टिंग का चरम रूप माना जाता है। सियाचिन में तैनात सैनिकों को विशेष सियाचिन Allowance मिलता है, जो उनके शारीरिक और मानसिक बलिदान का आर्थिक सम्मान है। यह अलाउंस न केवल जोखिम की भरपाई करता है, बल्कि उनके परिवारों के लिए एक आर्थिक सुरक्षा कवच भी बनता है।

हाई एल्टीट्यूड और फील्ड एरिया अलाउंस की भूमिका

ऊंचाई वाले क्षेत्रों में तैनात जवानों को High Altitude Allowance मिलता है जो ₹1,060 से ₹16,900 प्रतिमाह तक हो सकता है। वहीं, कठिन फील्ड एरिया में ड्यूटी करने पर Field Area Allowance भी दिया जाता है जो ₹10,500 से ₹21,000 प्रतिमाह तक बढ़ सकता है। ये भत्ते उस जोखिम और असुविधा की भरपाई करते हैं जो ऐसे इलाकों में ड्यूटी के दौरान झेलनी पड़ती है।

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सेना और अर्धसैनिक बलों में अलाउंस का अंतर

एक महत्वपूर्ण विषय यह है कि कई बार एक जैसे क्षेत्रों में तैनाती के बावजूद सेना और अर्धसैनिक बलों को मिलने वाले अलाउंस में अंतर होता है। इसका मुख्य कारण श्रेणियों का अलग-अलग निर्धारण है। यह विषय समय-समय पर चर्चा का कारण बनता है और इसमें सुधार की आवश्यकता पर ज़ोर दिया जाता है ताकि हर जवान को उसके जोखिम और त्याग के अनुसार उचित सम्मान और लाभ मिल सके।

अन्य सहायक भत्ते और सुविधाएं

रिस्क पोस्टिंग के अलावा जवानों को महंगाई भत्ता (Dearness Allowance – DA), आवास भत्ता (House Rent Allowance – HRA) और परिवहन भत्ता (Transport Allowance) जैसे कई अन्य लाभ मिलते हैं। यह भत्ते न केवल उनकी तैनाती की स्थिति को संतुलित करते हैं, बल्कि उनके परिवारों के जीवन स्तर को बनाए रखने में भी मदद करते हैं। इन सभी सुविधाओं का कुल योग उनकी सैलरी को एक सम्मानजनक स्तर पर बनाए रखता है।

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