
सरकारी कर्मचारियों की लंबे समय से चली आ रही मांग के बाद नरेंद्र मोदी सरकार ने 8वें वेतन आयोग (8th Pay Commission) की घोषणा कर दी है। बजट 2025 से पहले हुए इस ऐलान के बाद से ही सरकारी कर्मचारियों में उत्साह देखने को मिल रहा है। सबसे बड़ा सवाल यह है कि इस आयोग के लागू होने से कर्मचारियों की सैलरी पर कितना असर पड़ेगा और उनकी आय में कितनी वृद्धि होगी। आइए इस नए वेतन आयोग के संभावित प्रभावों को विस्तार से समझते हैं।
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फिटमेंट फैक्टर के आधार पर होगी सैलरी तय
सरकारी कर्मचारियों की सैलरी में वृद्धि फिटमेंट फैक्टर (Fitment Factor) के आधार पर तय होगी। यह फैक्टर पहले से तय मानकों पर निर्भर करेगा। जानकारी के मुताबिक, 8वें वेतन आयोग में फिटमेंट फैक्टर 2.86 प्रतिशत हो सकता है।
7वें वेतन आयोग (7th Pay Commission) के दौरान फिटमेंट फैक्टर 2.57 प्रतिशत था, जिससे यह अनुमान लगाया जा रहा है कि नए आयोग में यह इससे कम नहीं होगा। वहीं, JCM स्टाफ की मांग है कि सभी लेवल के कर्मचारियों के लिए एक समान फिटमेंट फैक्टर लागू किया जाए। 7वें वेतन आयोग में विभिन्न स्तरों के लिए फिटमेंट फैक्टर इस प्रकार था:
- लेवल 1: 2.57 प्रतिशत
- लेवल 2: 2.63 प्रतिशत
- लेवल 3: 2.67 प्रतिशत
- लेवल 4: 2.72 प्रतिशत
- उच्च स्तर: 2.81 प्रतिशत
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कितनी बढ़ेगी सैलरी?
नए वेतन आयोग के लागू होने के बाद सरकारी कर्मचारियों की न्यूनतम सैलरी में उल्लेखनीय वृद्धि देखने को मिल सकती है। अनुमान के मुताबिक:
- फिटमेंट फैक्टर 1.92 प्रतिशत: न्यूनतम वेतन ₹18,000 से बढ़कर ₹34,650 हो सकता है।
- फिटमेंट फैक्टर 2.08 प्रतिशत: न्यूनतम वेतन ₹18,000 से बढ़कर ₹37,440 हो सकता है।
- फिटमेंट फैक्टर 2.86 प्रतिशत: न्यूनतम वेतन ₹18,000 से बढ़कर ₹51,480 हो सकता है।
इस बढ़ोतरी का लाभ सिर्फ निचले स्तर के कर्मचारियों को ही नहीं, बल्कि उच्च ग्रेड के अधिकारियों को भी मिलेगा। इससे सरकारी कर्मचारियों की वित्तीय स्थिति और क्रय शक्ति में सकारात्मक बदलाव देखने को मिलेगा।
वेतनमानों के विलय का सुझाव
सरकारी कर्मचारियों के वेतनमानों को अधिक सरल बनाने के लिए 1 से 6 लेवल को मर्ज करने का सुझाव दिया गया है। यदि ऐसा होता है तो वेतन संरचना काफी आसान हो जाएगी। राष्ट्रीय संयुक्त परामर्श तंत्र (National Joint Consultative Machinery – JCM) ने सिफारिश की है कि:
- लेवल 1 के कर्मचारियों को लेवल 2 में मर्ज किया जाए।
- लेवल 3 को लेवल 4 में मिलाया जाए।
- लेवल 5 को लेवल 6 में विलय किया जाए।
इससे न केवल वेतन ग्रेड का सरलीकरण होगा बल्कि वेतन संरचना भी अधिक प्रभावी और पारदर्शी होगी।
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